निर्भया रेप केस: राष्ट्रपति के पास पहुंची दया याचिका, गृह मंत्रालय ने की खारिज करने की गुजारिश

 


 





नई दिल्ली
हैदराबाद रेप केस के आरोपियों के एनकाउंटर के बीच निर्भया रेप केस मामले में बड़ी खबर आई है। इसमें गृह मंत्रालय ने दोषी द्वारा दायर दया याचिका को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के पास भेज दिया है। हालांकि, गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति से इस याचिका को खारिज करने की भी गुजारिश की है। बता दें कि याचिका कि यह फाइल दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से होते हुए गृह मंत्रालय पहुंची थी।

आगे क्या होगा
मंत्रालय द्वारा अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेजना प्रक्रिया का हिस्सा है। अब राष्ट्रपति दया याचिका का निपटारा करेंगे। अगर राष्ट्रपति दया याचिका खारिज कर दें उसके बाद मुजरिम को फांसी पर लटकाने का रास्ता साफ होता है। अगर अब इस याचिका को खारिज कर दिया जाता है तो फिर संबंधित कोर्ट इन चारों को फांसी पर लटकाए जाने के लिए डेट वॉरंट जारी करेगा। दया याचिका के निपटारे में गैर वाजिब देरी के आधार पर मुजरिम चाहे तो दोबारा सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सकता है।

16 दिसंबर 2019 को फांसी की अटकलें
16 दिसंबर 2012 को निर्भया गैंगरेप की वारदात के चारों दोषियों को आगामी 16 दिसंबर को ही फांसी पर लटकाने की अटकलें चल रही हैं। तिहाड़ जेल प्रशासन का कहना है कि चारों कैदियों को आगामी 16 दिसंबर को ही फांसी पर लटकाया जाएगा या नहीं। इस बारे में फिलहाल वह कुछ नहीं कह सकते। लेकिन इतना तय है कि जैसे ही इनकी दया याचिका राष्ट्रपति से खारिज की जाएगी। वैसे ही जेल प्रशासन इन्हें फांसी पर लटकाने के लिए तैयारियां शुरू कर देगा।

हालांकि, इसके लिए कुछ कानूनी राय लेना शुरू भी कर दिया गया है। क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश में कहा गया था कि राष्ट्रपति के पास से फांसी की दया याचिका खारिज होने के बाद भी दोषियों को 14 दिन का वक्त दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों की जेल प्रशासन स्टडी कर रहा है। अगर वह निर्भया गैंगरेप जैसे मामले के दोषियों पर लागू नहीं होता है तो फिर राष्ट्रपति के पास से दया याचिका खारिज होने के बाद इन्हें कभी भी लटकाया जा सकता है। वह डेट 16 दिसंबर भी हो सकती है या कोई और। यह तय करना संबंधित कोर्ट का काम है।

मामले में तिहाड़ जेल में बंद चारों दोषियों मुकेश, विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह और पवन गुप्ता में से केवल विनय ने ही राष्ट्रपति के नाम सीधे तौर पर दया याचिका लिखी है। बाकी तीन में मुकेश ने कुछ भी लिखने से इंकार कर दिया था। इनमें से दो जेल नंबर-2 में, एक जेल नंबर-4 में और एक मंडोली की जेल नंबर-14 में बंद है। हालांकि, राष्ट्रपति का अंतिम फैसला चारों पर लागू होगा। जैसे ही राष्ट्रपति के यहां से इनकी दया याचिका खारिज होगी। वैसे ही इन्हें अन्य कैदियों के साथ से हटाकर अलग सेल में शिफ्ट कर दिया जाएगा और इनके ऊपर 24 घंटे निगरानी शुरू कर दी जाएगी। मामले के एक दोषी रामसिंह ने जेल में फांसी लगा ली थी। एक को नाबालिग होने का फायदा मिल गया था।

निर्भया से 16 दिसंबर 2012 को सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। बुरी तरह जख्मी युवती की बाद में मौत हो गई थी। रेप की इस बर्बर घटना के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था और हर जगह विरोध प्रदर्शन हुए थे।