संजय राउत बोले- सावरकर के विरोधियों को जेल भेजो, शिवसेना ने बयान से किया किनारा


मुंबई
शिवसेना नेता संजय राउत के विनायक दामोदर सावरकर का विरोध करने वालों को जेल भेजने वाले बयान पर शिवसेना डैमेज कंट्रोल मोड में आ गई है। पार्टी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने राउत के बयान से किनारा करते हुए कहा कि उन्होंने इसपर सफाई दे दी है और इससे गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राउत ने कहा था कि सावरकर को भारत रत्न देने का विरोध करने वालों को उसी जेल में भेज देना चाहिए, जहां सावरकर को अंग्रेजों ने रखा था ताकि उनके संघर्षों का एहसास हो सके। बता दें कि कांग्रेस के सीनियर नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने एक दिन पहले ही यह बयान दिया था कि नरेंद्र मोदी सरकार अगर सावरकर को भारत रत्न देती है तो इसका विरोध किया जाएगा।

आदित्य बोले, शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन मजबूत
इस बीच संजय राउत के बयान पर शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने कहा, 'राउत ने जिस संदर्भ में बयान दिया है, उन्होंने वह साफ कर दिया है। शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी अलायंस मजबूत है और हमलोग राज्य के विकास के लिए साथ आए हैं। हमलोगों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन यही तो लोकतंत्र है। इतिहास के बावजूद हमलोगों को मौजूदा मसलों पर बातचीत करने की जरूरत है।'

जेल जाने से पता चलेगा संघर्ष
राउत ने कहा है कि सावरकर के योगदान के बारे में किसी को तब ही पता चल सकता है जब उसे अंडमान-निकोबार की उसी जेल में डाल दिया जाए, जहां सावरकर को रखा गया था। गौरतलब है कि कांग्रेस नेता और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के सावरकर को लेकर दिए बयान के बाद से ही दोनों पार्टियों के बीच टकराव जारी है। कुछ दिन पहले राउत ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर विवादित बयान दे दिया था।

कांग्रेस ने किया था विरोध
वहीं, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने शुक्रवार को कहा कि सावरकर के अंग्रेजों से माफी मांगने की बात मिटाई नहीं जा सकती और अगर नरेंद्र मोदी सरकार उन्हें 'भारत रत्न' देती है तो पार्टी उसका विरोध करेगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 'जटिल और विवादित व्यक्तित्व' सावरकर के बारे में कुछ अच्छी और कुछ खराब बातें दोनों थीं, लेकिन कांग्रेस के लोगों को जो बात खराब लगती है, वह उसी के बारे में बात करेंगे।

चुनावी वादा था सावरकर को 'भारत रत्न'
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले साथ रहीं भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना ने चुनावी घोषणापत्र में सावरकर को भारत रत्न देने का वादा किया था। हालांकि, फिर दोनों पार्टियां अलग हो गईं और शिवसेना ने कांग्रेस-एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। इसके साथ ही भारत रत्न की बात पर भी स्थिति संशय की हो गई क्योंकि कांग्रेस वीर सावरकर को अंग्रेजों को 'माफी पत्र' लिखने वाला बताती रही है। इसके अलावा सेक्युलरिज्म की बात करने वाली पार्टी को हिंदुत्व पर उनके विचारों से भी आपत्ति रही है।

इंदिरा-सावरकर पर खींचतान
कुछ दिन पहले ही राउत ने कहा था कि पूर्व पीएम इंदिरा गांधी मुंबई में अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला से मिलने आती थीं। इस बयान के बाद कांग्रेस की ओर से कई नेताओं ने संजय राउत को आड़े हाथ लिया, जिसके बाद संजय राउत को अपना बयान वापस लेना पड़ा। वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस सेवादल की बुकलेट में सावरकर और महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के बीच शारीरिक संबंध का दावा किया गया था जिसके बाद शिवसेना ने कांग्रेस को आड़े हाथ लिया था।


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