अब अजित पवार बोले, मैं एनसीपी में ही हूं, 5 साल चलाएंगे सरकार, ऑल इज वेल


मुंबई
देवेंद्र फडणवीस के सीएम बने रहने को लेकर भले ही आशंकाएं जाहिर की जा रही हों, लेकिन बीजेपी खासे जोश में नजर आ रही है। इस बीच अजित पवार ने एक नया ट्वीट करते हुए कहा, 'मैं एनसीपी में ही हूं और शरद पवार हमारे नेता हैं। बीजेपी-एनसीपी का गठबंधन राज्य में अगले 5 सालों के लिए स्थिर सरकार देगा। राज्य और आम लोगों के कल्याण के लिए हमारी सरकार गंभीरता से काम करेगी।'


इसके बाद एक और ट्वीट में अजित पवार ने लिखा कि किसी भी चिंता की जरूरत नहीं है, सब कुछ अच्छा है। हालांकि कुछ धैर्य की जरूरत है। समर्थन के लिए सभी का आभार। अजित पवार की ओर से ट्वीट में यह लिखा जाना कि बीजेपी और एनसीपी की सरकार 5 साल तक चलेगी, यह बताता है कि वह अब भी खुद को पार्टी के विधायक दल का नेता मानते हैं। साफ है कि बीजेपी सुप्रीम कोर्ट में उनकी ओर से दिए समर्थन पत्र का इस्तेमाल कर सकती है। इसके अलावा विश्वास मत के दौरान भी अजित पवार की ओर से विधायक दल के नेता के तौर पर विप जारी की जा सकती है। 


अजित के भरोसे खुश है BJP, कहा- आनंद का माहौल
एक तरफ अजित पवार ने 5 साल सरकार चलाने की बात कही है तो दूसरी तरफ बीजेपी ने भी अपने विधायकों की बैठक के बाद उत्साह दिखाया है। विधायकों की मीटिंग के बाद बीजेपी लीडर आशीष शेलार ने कहा कि हमारी सरकार 5 साल पूरे करेगी। यही नहीं उन्होंने कहा कि फडणवीस और अजित पवार की शपथ के बाद से पूरे राज्य में आनंद का वातावरण है। इसके लिए अब जो काम बचे हैं, उन्हें पूरा करना है।


BJP ने तय की फ्लोर टेस्ट जीतने की रणनीति'
शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि हम विधानसभा में विश्वास मत जीतने में सफल होंगे। शेलार ने कहा, 'विधायकों के साथ मीटिंग में हमने फ्लोर टेस्ट में जीतने की रणनीति तय की है।' उन्होंने कहा कि इस मीटिंग में हमने देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के अभिनंदन का प्रस्ताव पारित किया। विधायकों ने कहा कि महागठबंधन को जनादेश स्पष्ट था, उसका अनादर करने का काम शिवसेना ने किया है।

बीजेपी बोली, शिवसेना ने किया विचारधारा से समझौता

आशीष शेलार ने एक बार फिर से शिवसेना पर गठबंधन तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिवसेना ने विचारधारा समझौता करते हुए अपनी राह अलग की है। बीजेपी लीडर ने कहा कि बाला साहेब ठाकरे के दौर से हम बीते 30 सालों से जिस विचारधारा को लेकर चल रहे थे, उसे छोड़ने का काम भी शिवसेना ने ही किया है।