फ्लोर टेस्ट से पहले उद्धव ठाकरे के सामने फंसा नया पेंच, फिर डेप्युटी सीएम पर अड़ी कांग्रेस


मुंबई
शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर भले ही बीजेपी को किनारे लगा सत्ता हासिल कर ली है, लेकिन अब उसके सामने गठबंधन सरकार के पेचों को सुलझाने की चुनौती है। सूत्रों के मुताबिक उद्धव सरकार के साथ 6 कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली थी और अन्य के बाद में शपथ लेने की बात कही जा रही थी। अब कहा जा रहा है कि उद्धव सरकार का कैबिनेट विस्तार अभी और टल सकता है।


शनिवार को उद्धव सरकार को विधानसभा के पटल पर बहुमत साबित करना है। उससे पहले वह कांग्रेस और एनसीपी को साधने में जुटी है। बहुमत परीक्षण से पहले महागठबंधन की विधान भवन में मीटिंग चल रही है। इस पर स्पीकर के चुनाव को लेकर चर्चा होने की खबर है। हालांकि कहा जा रहा है कि इस दौरान डेप्युटी सीएम और मंत्री पदों को लेकर बात हो सकती है।


वजह यह है कि कांग्रेस ने अब एक बार फिर से अपनी डेप्युटी सीएम की मांग दोहरा दी है। पहले कहा जा रहा था कि तीनों दलों के बीच इस बात को लेकर सहमति बनी है कि शिवसेना का सीएम, एनसीपी का डेप्युटी सीएम और कांग्रेस का विधानसभा स्पीकर रहेगा। इसी फॉर्म्युले के तहत कांग्रेस के सीनियर लीडर पृथ्वीराज चव्हाण को स्पीकर पद का ऑफर दिया गया था। हालांकि चव्हाण ने यह कहते यह ऑफर खारिज कर दिया था कि वह सीएम रह चुके हैं, जो प्रोटोकॉल में स्पीकर से ऊपर होता है, इसलिए वह यह पद नहीं लेंगे। 


उद्धव ठाकरे के साथ शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के नितिन राउत और बालासाहेब थोराट ने शपथ ली थी। इसके अलावा एनसीपी की ओर से जयंत पाटील और छगन भुजबल ने कैबिनेट के लिए शपथ ली थी। माना जा रहा है कि एनसीपी की ओर से डेप्युटी सीएम के तौर पर अजित पवार शपथ ले सकते हैं। हालांकि अब तक इस पर एनसीपी में ही आम सहमति नहीं बन सकी है।

मंत्रालयों को लेकर भी चल रही खींचतान

कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के बीच मंत्रालयों को लेकर भी खींचतान चल रही है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा, 'सभी पार्टियों ने गृह, शहरी विकास, राजस्व, हाउसिंग ऐंड कोऑपरेशन मंत्रालयों पर दावा ठोका है। हमें उम्मीद है कि शरद पवार दखल देंगे। हमें लगता है कि समय पर सभी विवाद समाप्त हो जाएंगे और नई सरकार अच्छे से काम करना शुरू कर देगी।'