शाह के बाद अब हेमंत बिस्व शर्मा बोले, देश के साथ असम में भी नए सिरे से बने NRC


गुवाहाटी
होम मिनिस्टर अमित शाह की ओर से बुधवार को संसद में देश भर में एनआरसी लागू करने के ऐलान के बाद असम सरकार ने राज्य में भी इसे नए सिरे से तैयार कराने की मांग की है। असम सरकार के मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि पूरे देश के साथ ही असम में भी नए सिरे से नैशनल सिटिजंस रजिस्टर तैयार किया जाना चाहिए। बता दें कि हेमंत बिस्वा शर्मा शुरुआत से ही असम में 31 अगस्त को जारी हुए एनआरसी के फाइनल ड्राफ्ट में खामियां बताते हुए विरोध करते रहे हैं।


दरअसल असम में बीजेपी की ओर से नई एनआरसी तैयार करने की मांग की वजह यह है कि बांग्लादेश से 1971 के बाद आने वाले तमाम हिंदू भी इस लिस्ट से बाहर हैं। ऐसे में बीजेपी को एक बड़े वर्ग की नाराजगी का खतरा है। बता दें कि सरकार इसी सत्र में नागरिकता संशोधन विधेयक भी लाने की तैयारी में है, जिसके तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान से आने वाले गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान होगा, जिन्हें भारत में आए 1 से लेकर 6 साल तक हुए हैं।


1971 के बाद आए हिंदू भी हैं NRC से बाहर
दरअसल फाइनल NRC में उन लोगों के नाम शामिल किए गए, जो 25 मार्च 1971 के पहले से असम के नागरिक हैं या उनके पूर्वज राज्य में रहते आए हैं। इस बात का सत्यापन सरकारी दस्तावेजों के जरिए किया गया। ऐसे में वे तमाम हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध भी इस लिस्ट से बाहर हो गए हैं, जो कि 1971 के बाद भारत आए हैं। इसके चलते असम में इस मुद्दे को भुनाने वाली बीजेपी को झटका लगता दिख रहा है।


हिंदू वोटबैंक साधने की कोशिश में बीजेपी?

जानकारों के मुताबिक ऐसे में असम सरकार की यह मांग हिंदू वोटबैंक को साधने की एक कोशिश लगती है। असम में एनआरसी के मुद्दे को अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत से ही उठाते रहे असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने एनआरसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें तमाम खामियां हैं, जिसके बारे में हम पहले ही सवाल उठा चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई हैं याचिकाएं

उन्होंने कहा, 'असम के तमाम सामाजिक संगठनों ने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। हमारा मानना है कि मौजूदा एनआरसी को हटाना चाहिए और पूरे देश में चलने वाली प्रक्रिया के तहत नए सिरे से इसे तैयार करना चाहिए।'

असम के लोगों की उम्मीदें नहीं हुईं पूरी
उन्होंने साफ कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सुपरविजन में स्टेट कॉर्डिनेटर प्रतीक हजेला की ओर से तैयार एनआरसी असम के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में असफल रही है।


किसी भी धर्म के लोग बन सकते हैं एनआरसी का हिस्सा: शाह
शर्मा से पहले होम मिनिस्टर अमित शाह ने संसद में कहा, 'एनआरसी में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है जिसके आधार पर कहा जाए कि और धर्म के लोगों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। सभी नागरिक भले ही उनका धर्म कुछ भी हो, एनआरसी लिस्ट में शामिल हो सकते हैं। एनआरसी अलग प्रक्रिया है और नागरिकता संशोधन विधेयक अलग प्रक्रिया है। इसे एक साथ नहीं रखा जा सकता।' इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा ताकि भारत के सभी नागरिक एनआरसी लिस्ट में शामिल हो सकें।


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