अनाज मंडी आग पर फायर अफसर ने कहा, संकरी गलियां और सही जानकारी न मिलने के कारण बढ़ी मौतों की संख्या


नई दिल्ली
दिल्ली के जिस अनाज मंडी इलाके में आज भीषण आग लगी, वहां की गलियां बहुत संकरी हैं। साथ ही, आसपास पानी का साधन भी नहीं है, जिस कारण दमकल की गाड़ियों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ा। मौके पर पहुंचे डेप्युटी चीफ फायर ऑफिसर ने बताया कि उन्हें जब आग लगने की जानकारी दी गई तो सिर्फ यह बताया गया था कि एक बिल्डिंग में आग लग गई है, यह नहीं बताया गया कि वहां लोग फंसे हैं। बहरहाल, बिल्डिंग मालिक के भाई को हिरासत में ले लिया गया है। कहा जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी। इस भयावह घटना में 43 लोगों की जानें जा चुकी हैं जबकि कई अन्य पीड़ितों की हालत नाजुक है। इस बीच, दिल्ली सरकार ने अनाज मंडी क्षेत्र में लगी आग के मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। दिल्ली के राजस्व मंत्री कैलाश गहलोत ने बताया है कि सात दिन में रिपोर्ट मांगी गई है।


बचाओ-बचाओ की चीखें आ रही थीं: फायर ऑफिसर
डेप्युटी फायर चीफ सुनील चौधरी ने बताया, '600 स्क्वैयर फीट के प्लॉट में आग लगी। यहां अंदर से बेहद अंधेरा है। यहां फैक्ट्री है जहां स्कूल बैग, बोतलें और कई अन्य सामान रखे गए थे।' उन्होंने कहा कि रिहाइशी इलाके में अवैध तरीके से फैक्ट्री चल रही थी। उन्होंने कहा कि जब दमकल टीम मौके पर पहुंचीं तो कमरों के अंदर से बचाओ-बचाओ की चीखें आ रही थीं। जब कमरों के दरवाजे खोले गए तो कुछ लोग अंदर से निकल सके। मारे जाने वाले लोगों में ज्यादातर बिहार के बेगुसराय, समस्तीपुर जैसे जिलों से हैं। वहीं, कुछ मृतक उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बताए जा रहे हैं।

दमकल टीम को लोगों के फंसे होने की जानकारी नहीं थी
उन्होंने कहा, 'अगर हमें बताया जाता कि यहां इतनी बड़ी संख्या में लोग फंसे हैं तो हम और ज्यादा दल-बल के साथ यहां पहुंचते। उस स्थिति में ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सकती थी।' चीफ फायर ऑफिसर के मुताबिक, 50 से ज्यादा लोगों को निकाला जा चुका है, उनमें से ज्यादातर लोगों की जान बच जाएगी। हालांकि, जिन्हें निकालने में देर हो गई, उनके बचने की उम्मीद काफी कम है क्योंकि धुआं इतना गहरा गया था कि दम घुटने की आशंका बहुत ज्यादा है।


फैक्ट्री और रिहाइश, साथ-साथ
दरअसल, जिस बिल्डिंग में आग लगी, उसमें फैक्ट्री के साथ-साथ लोगों की रिहाइश भी थी। बताया जा रहा है कि बिल्डिंग में बेकरी गोदाम चल रहा था और लोग वहीं सोते भी थे। यहां पैकेजिंग का काम भी होता था। चूंकि फैक्ट्रियां आपस में जुड़ी हुई हैं, इसलिए आग जल्दी-जल्दी फैलती गई। इलाके की गलियां बेहद संकरी हैं, इसलिए एक बार में एक ही गाड़ी अंदर जा सकती है। इससे भी राहत कार्य को तेजी से अंजाम नहीं दिया जा सका। यही वजह है कि धुएं का गुबार फैलता गया और लोग बेहोश होने लगे।


चार अस्पतालों में हो रहा इलाज
बहरहाल, निकाले गए लोगों को एलएनजेपी, सफदरजंग, हिंदूराव और आरएमएल अस्पतालों में पहुंचाया गया है। कहा जा रहा है कि इन अस्पतालों का बर्न वॉर्ड घटना के शिकार लोगों से भर चुका है। इनके इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों से भी डॉक्टरों को बुलाया गया है। एलएनजेपी, सफदरजंग समेत चार अस्पतालों में घायलों का इलाज चल रहा है।


उधर, नॉर्थ दिल्ली की डीसीपी मोनिका भारद्वाज भी मौके पर पहुंचीं। बिल्डिंग में अवैध रूप से फैक्ट्री चलाने के लिए बिल्डिंग मालिक के भाई को हिरासत में लिया जा चुका है। ऐम्बुलेंस की 70 गाड़ियां लोगों को अस्पताल पहुंचाने में जुटी थीं। वहीं, करीब 35 फायर ब्रिगेड टीमें राहत कार्य में जुट गई थीं। चार घंटे से ज्यादा वक्त से राहत कार्य चल रहा है। 


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