'छपाक' वाला प्रोस्थेटिक मेकअप जब तक पूरी तरह जला नहीं, वहीं खड़ी रहीं दीपिका पादुकोण


मेघना गुलजार की फिल्म 'छपाक' का ट्रेलर मंगलवार को लॉन्च किया गया। दीपिका पादुकोण इस फिल्म में एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल का किरदार निभा रही हैं। साथ ही दीपिका ने इस फिल्म से बतौर प्रड्यूसर भी अपना डेब्यू किया है। ट्रेलर लॉन्च के दौरान दीपिका काफी इमोशनल नजर आईं। वह ट्रेलर को देखते ही रो पड़ीं। दीपिका इतनी रुआंसी हो गई थीं कि जवाब देने के दौरान कई बार लड़खड़ा भी गईं। 



लक्ष्मी से मिलने से पहले बहुत नर्वस थी लक्ष्मी से पहली मुलाका को लेकर दीपिका काफी नर्वस हो गई थीं। दीपिका कहती हैं, 'जब लक्ष्मी पहली बार सेट पर आ रही थीं तो मैं बहुत नर्वस थीं। पहली बार मैं किसी ऐसे इंसान का किरदार निभा रही हूं, जो जिंदा है। यह मेरे लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी थी। जब वह मेरे पास आईं और उन्होंने मुझे प्रॉस्थेटिक में देखा, तो उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि मैं खुद को देख रही हूं। सच कहूं तो एक ऐक्टर के लिए यह सबसे बड़ा कॉम्पिलिमेंट होता है। वह बहुत ही यूनिक पर्सनैलिटी हैं। मेरी फेवरेट लोगों में लक्ष्मी शुमार हैं।' वहीं लक्ष्मी के किरदार से निकलने पर दीपिका ने कहा, 'इस फिल्म ने मुझे बहुत ही इमोशनली निचोड़ दिया था। शूटिंग के आखिरी दिन मैंने प्रोस्थेटिक मेकअप को उतारकर सेट के पास ही जला दिया। मैं तब तक वहीं खड़ी रही, जबतक वह पूरी तरह जल नहीं गया। तब जाकर किरदार को अलविदा कहा।' 

मेकर्स और ऐक्टर्स जिम्मेदार हों'
दीपिका से जब पहला सवाल पूछा गया कि आखिर उन्होंने किन कारणों से फिल्म के लिए हामी भरी? तो जवाब में दीपिका ने कहा,'मुझे लगता है कि इस तरह की स्क्रिप्ट रोजाना नहीं बनती। ऐसी कहानी जो आपको बहुत ज्यादा प्रेरित करे। कहानी किसी घटना से कहीं ज्यादा बढ़कर है। मैं खुद को खुशनसीब मानती हूं कि मुझे लक्ष्मी (ऐसिड सर्वाइवर) से मिलने का मौका मिला। उनके जीने का जज्बा और जिंदादिली को शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। साथ ही यह भी मायने रखता है कि कहानी कौन व्यक्ति बता रहा है। मेघना के डायरेक्शन में जो ईमानदारी और प्रतिबद्धता है, इससे अहसास हो गया था कि मैं एक अच्छे हाथों में हूं। मेघना ऐसी डायरेक्टर हैं, जो कहानी को एक जिम्मेदार तरीके से संजो सकती हैं। जब मेघना मेरे पास आई थीं, तो हमने बस नरेशन के दौरान पहला पन्ना ही पढ़ा होगा, मैंने उनसे झट से कहा कि मैं यह फिल्म कर रही हूं। सच कहूं, तो यह मेरे साथ बहुत कम होता है, मैं अमूमन समय लेती हूं।'

सक्सेस का यही पैमाना
वहीं जब दीपिका से पूछा गया कि वे इसके सक्सेस का क्या स्कोप देखती हैं? जवाब में दीपिका ने कहा, 'अगर यह फिल्म लोगों को सोचने पर मजबूर कर दे या उन्हें झकझोर दे, तो मेरे लिए सक्सेस का यही पैमाना होगा। यह फिल्म ऐसी है, जिसे मैं दस साल बाद भी देखना चाहूंगी।'

मालती के किरदार की जर्नी पर दीपिका ने कहा
उन्होंने कहा, 'जब मैं इस किरदार के प्रॉस्थेटिक मेकअप से गुजर रही थी, तो मुझे खुद इसका अंदाजा नहीं था कि मैं अगर इसे पहली बार देखूंगी, तो किस तरह रिएक्ट करूंगी। हैरानी की बात यह है कि जब लुक टेस्ट के दौरान मैंने खुद को आईने में देखा, तो मुझे लगा कि मैं खुद को महसूस कर रही हूं। कुछ भी नहीं बदला...और वो ही दिन था, जब लगा कि मैं इस फिल्म के लिए पूरी तरह से तैयार हूं।'

मेकर्स और ऐक्टर्स हों कितने रिस्पॉन्सिबल
दीपिका ने कहा, 'मेकर्स और ऐक्टर्स का रिस्पॉन्सिबल होना बहुत जरूरी है। सिनेमा एक पावरफुल मीडियम है और आप इससे भाग नहीं सकते। यूथ इससे प्रभावित होते हैं। अब यह इंसान पर निर्भर करता है कि वह अपनी कहानी को किस तरह बताना चाहता है। मैं यह क्लेम नहीं कर सकती कि मैं यह जिम्मेदारी पहले से निभाती आ रही हूं। मैंने बहुत सी चीजें समय के साथ सीखी हैं।'

छपाक को वुमन सेंट्रिक न बनाएं
विक्रांत मेसी इस फिल्म में आलोक दीक्षित के किरदार को साकार कर रहे हैं। फिल्म का हिस्सा बनने पर विक्रांत ने कहा, 'हम जिस समय में जी रहे हैं और रोजाना अखबारों में पढ़ रहे हैं। उस हिसाब से यह फिल्म आज के दौर की जरूरत है। हमारी कोशिश यही है कि फिल्म जो मेसेज देने की कोशिश कर रही है, वह लोगों तक जरूर पहुंचे।' 'तलवार', 'राजी' जैसी फिल्मों से लोगों का दिल जीत चुकीं मेघना ने 'छपाक' के मेकिंग का एक्स्पीरियंस शेयर करते हुए कहा, मुझे इस फिल्म की जर्नी ने जो सिखाया है, वह यह है कि ऐसिड सर्वाइवर को हमसे किसी तरह की सांत्वना नहीं चाहिए। वे बेबाक हैं। यहां हम लोग हैं, जो उनसे नजरें मिलाने से हिचकिचाते हैं और इसी बदलाव की जरूरत है। इस फिल्म के निजी जिंदगी पर पड़े प्रभाव पर मेघना कहती हैं, 'इस फिल्म में हमारे साथ बहुत सी ऐसिड सर्वाइवर ने काम किया है। मैंने उन्हें देखकर यही सीखा है कि हम महिलाएं कितनी स्ट्रॉन्ग हैं उसका अंदाजा तब लगता है, जब हम किसी बहुत बड़े ट्रॉमैटिक स्थिति से गुजरते हैं। मैं उनके अंदर की शक्ति देखकर मुरीद हो गई उन्होंने जिस ऐटिट्यूड के साथ अपनी घटनाओं से उबर कर जिंदगी को स्वीकारा है, वह वाकई में काबिल-ए-तारीफ है। मुझे लगता है कि हम सभी महिलाओं के अंदर ऐसी शक्ति है, जिसका हमें अहसास नहीं है। मेघना से जब यह सवाल किया गया कि फीमेल सेंट्रिक फिल्म को कर्मशल ढांचे पर लाना कितना चैलेंजिंग है तो जवाब में मेघना ने कहा, 'मेरी सबसे बड़ी रिक्वेस्ट यही है कि इस फिल्म को वुमन सेंट्रिक के ढांचे में न डालें। क्योंकि मुझे लगता है कि जो कहानियां मैं कहती हूं, मानती हूं उसमें महिला का किरदार स्ट्रॉन्गर होता है, लेकिन वह सिर्फ महिला की कहानी नहीं होती है। मैं डायरेक्शन के वक्त यह नहीं सोचती कि मुझे सेंसेटिव या कर्मशल कहानी बनानी है। मैं अपने दिल की सुनती हूं और पूरी श्रद्धा से कहानी कहने की कोशिश करती हूं। अब वह कर्मशल हो या न हो, इसपर मेरा कोई कंट्रोल नहीं रह जाता है। कोई भी फ्लॉप फिल्म बनाने के लिए तो फिल्म नहीं बनाता है। हम सभी चाहते हैं कि फिल्म अच्छा काम करे।'


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