एनपीआर और एनआरसी को अलग करने के लिए सरकार को नियमों में बदलाव की पड़ेगी जरूरत





 





भारती जैन, नई दिल्ली
नैशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने को केंद्रीय कैबिनेट से हरी झंडी मिलने को विपक्ष एनआरसी (नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) से जोड़कर देख रहा है। एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने तो एनपीआर को गुप्त रूप से एनआरसी लागू करने की कवायद बताया है। इसके बाद खुद गृह मंत्री अमित शाह को सफाई देनी पड़ी कि एनपीआर का एनआरसी से दूर तलक कोई संबंध नहीं है। हालांकि, एनपीआर प्रक्रिया को जिस नियम के तहत नोटिफाई किया गया है, उसके शीर्षक में ही NRIC (नैशनल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिजंस) का जिक्र है। इससे साफ है कि अगर सरकार एनपीआर को एनआरसी से पूरी तरह अलग करना है तो सरकार को नियमों में बदलाव करना पड़ेगा।

अगर सरकार एनपीआर को एनआरसी से अलग करना चाहती है तो उसे 2003 के सिटिजनशिप रूल्स को बदलना पड़ेगा जिसमें पॉपुलेशन रजिस्टर में दर्ज ब्यौरे के वेरिफिकेशन की बात कही गई है। पिछली यूपीए सरकार ने 2010 में एनपीआर को तैयार करने में 2003 के नियमों को आंशिक तौर पर लागू किया था। 2005 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने एनआरसी के नियमों को बनाया था जिसे नागरिकों का रजिस्टर तैयार करने के सरकार के इरादे के संकेत के रूप में देखा गया। हालांकि, तब प्रक्रिया को शुरू ही नहीं किया गया। दूसरी तरफ, एनडीए सरकार आने के बाद 2015 में एनपीआर को अपडेट किया गया।

एनपीआर की प्रक्रिया को 2003 के सिटिजनशिप रूल्स (रजिस्ट्रेशन ऑफ सिटिजंस ऐंड इश्यू ऑफ नैशनल आइडेंटिटी कार्ड्स) के तहत नोटिफाई किया गया है। इसके टाइटल में ही NRIC का जिक्र है। यह नियम कहता है कि NRIC को सब-पार्ट्स में बांटा जाएगा जिनमें स्टेट रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिजंस, डिस्ट्रिक्ट रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिजंस, सब-डिस्ट्रिक्ट रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिजंस और लोकल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिजंस शामिल हैं।

नियम 3 का उपनियम 4 कहता है, 'लोकल रजिस्ट्रार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले हिस्सों में रह रहे सभी लोगों से जुड़ी सूचनाओं को इकट्ठा कर पॉपुलेशन रजिस्टर को तैयार करने के लिए केंद्र सरकार कोई तारीख तय कर सकती है।' एनपीआर से जुड़ी अधिसूचना को इसी साल 31 जुलाई 2019 को जारी किया गया था, जिसमें इस उपनियम का हवाला किया है। नियम 3 का अगला उपनियम कहता है कि पॉपुलेशन रजिस्टर में दर्ज सूचनाओं का वेरिफिकेशन होगा और उसके बाद उस डीटेल को भारतीय नागरिकों के लोकल रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।

NRIC की तरह ही NPR भी लोकल, सब-डिस्ट्रिक्ट, डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और नैशनल लेवल पर तैयार हुआ है। लोकल पॉपुलेशन रजिस्टर भारतीय नागरिकों का लोकल रजिस्टर तैयार करने का आधार मुहैया कराएगा। तालुक या सब-डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार के यहां दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद इसे डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार ऑफ इंडियन सिटिजंस के यहां पेश किया जाएगा। डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार ऑफ इंडियन सिटिजन इन प्रविष्टियों को अपने तहत आने वाले सब-डिस्ट्रिक्ट के लोकल रजिस्टर में दर्ज करेगा। यही डीटेल NRIC में दर्ज किए जाएंगे।

सिटिजनशिप रूल्स के तहत रजिस्ट्रार जनरल ऑफ सिटिजन रजिस्ट्रेशन को NRIC प्रक्रिया को नोटिफाई करना होगा।



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