गोल्ड पर डिस्काउंट की गुंजाइश कम, आधे जूलर्स ने अपना लिया है हॉलमार्क


नई दिल्ली
सोने की जूलरी के लिए हॉलमार्किंग को अनिवार्य करने की तारीख भले ही एक साल दूर है, लेकिन बुलियन और जूलरी बाजारों में खासी हलचल है। अगले महीने जारी होने वाले नोटिफिकेशन और रोडमैप पर सबकी नजर है। जूलर्स चाहते हैं कि जागरूकता बढ़ने के साथ लोग हॉलमार्क को ही प्राथमिकता देंगे, ऐसे में डेडलाइन से पहले ही जूलर्स स्टैंडर्ड कैरेट में शिफ्ट करने में अपनी भलाई समझ रहे हैं।


स्टॉक निकालने की नहीं है जल्दी
करीब एक साल का मौका मिलने से बुलियन और जूलरी बाजारों में कोई खास हलचल देखने को नहीं मिल रही है और न ही जूलर स्टॉक निकालने की जल्दबाजी में हैं। दिल्ली में कम से कम आधे जूलर पहले ही बीआईएस हॉलमार्क के स्टैंडर्ड 14,18 और 22 में शिफ्ट हो चुके हैं, हालांकि कई असोसिएशंस हॉलमार्किंग में 20 कैरेट को शामिल करने की मांग कर रहे हैं और इसके लिए कोर्ट जाने की तैयारी में भी हैं।

स्टैंडर्ड कैरेट में शिफ्ट 50% जूलर्स
द बुलियन ऐंड जूलर्स असोसिएशन के प्रेसिडेंट योगेश सिघंल ने बताया, 'कन्ज्यूमर मिनिस्ट्री की ओर से 15 जनवरी 2021 से हॉलमार्किंग अनिवार्य करने की घोषणा के बाद से 14,18 और 22 कैरेट की जूलरी में लोग तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं। मेरे यहां 80% जूलरी इन्हीं कैरेट में आ चुकी है। मार्केट में औसतन 50% जूलर स्टैंडर्ड कैरेट में काम करने लगे हैं और हॉलमार्किंग के लिए तैयार हैं। बाकी लोगों के लिए 13 महीने का समय पर्याप्त है। इसलिए अनिवार्यता को लेकर कोई हलचल नहीं है।'


डिस्काउंट की भी नहीं कोई बात
करोलबाग सर्राफा असोसिएशन के मेंबर और जूलर संदीप जैन ने बताया कि हॉलमार्किंग अनिवार्य होने के चलते स्टॉक निकालने या डिस्काउंट देने जैसी कोई बात नहीं है। ज्यादातर जूलर खपत के हिसाब से ही सोना मंगाते हैं और बिक्री के बाद ही नया ऑर्डर देते हैं। अभी पूरा शादियों का सीजन, अक्षय तृतीया और अगले साल का अक्टूबर-नवंबर का पीक फेस्टिव सीजन बाकी है। ऐसे में एक साल बाद किसी के पास ऐसा स्टॉक शायद होगा जिसे मजबूरी में गलाना पड़े।

मुंबई सबसे सक्रिय
IBJA के नैशनल अडवाइजर सुरेंद्र मेहता ने बताया कि अभी भारत भर में 30,000 बीआईएस हॉलमार्क रजिस्टर्ड जूलर्स में से 40 पर्सेंट मुंबई के ही जूलर्स हैं। इसके अलावा जो नहीं हैं, वे तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं। मुंबई में जागरूकता का स्तर काफी ज्यादा है और सभी को पता है कि अगर वे कन्वर्ट नहीं होंगे तो उन्हें नुकसान होगा।'


20 कैरेट को हॉलमार्किंग से बाहर रखने को चुनौती
दूसरी ओर, बाजारों में अब भी बहुत सारे गहने 20 कैरेट के हैं। कई असोसिएशंस ने 20 कैरेट को हॉलमार्किंग से बाहर रखने को कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। चांदनी चौक के जूलर विनोद गुप्ता ने बताया कि 22 कैरेट में बहुत कम जूलरी बनती है और 14 या 18 कैरेट प्योरिटी के लिहाज से आकर्षित नहीं करते। पिछले चार साल से सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है कि कन्ज्यूमर डिमांड के लिहाज से 20 कैरेट को भी हॉलमार्किंग में शामिल किया जाए।

हॉलमार्किंग फिलहाल स्वैच्छिक
हॉलमार्किंग फिलहाल स्वैच्छिक है, लेकिन अनिवार्यता की सुगबुगाहट के साथ ही बीआईएस में रजिस्ट्रेशन कराने वाले जूलर्स की तादाद बढ़ने लगी है। बीआईएस के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में 735 जूलर्स ने हॉलमार्किंग रजिस्ट्रेशन ले लिया है। पिछले साल तक यह तादाद करीब 650 थी। 15 जनवरी 2020 को नोटिफिकेशन आने के बाद इसमें तेज उछाल देखने को मिल सकती है। दिल्ली में हॉलमार्क सेंटर्स की तादाद 41 से बढ़ाकर कम से कम 60 करने की योजना है।


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