हैदराबाद केस पर क्या कहते हैं मुंबई के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट?


मुंबई
हैदराबाद महिला पशु चिकित्सक के साथ गैंगरेप और हत्या मामले के चार आरोपियों के एनकाउंटर पर पूरे देश से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह सही है तो कुछ गलत के साथ खड़े हुए हैं। हालांकि, मुंबई के ज्यादातर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट इस मुठभेड़ को सही बता रहे हैं।


114 आरोपियों को एनकाउंटर में मारने वाले प्रदीप शर्मा कहते हैं कि हैदराबाद पुलिस ने जो किया है, वह उनका बहुत ही साहसिक कदम है। उन्होंने सीआरपीसी के सेक्शन 100 के तहत सेल्फ डिफेंस में यह एनकाउंटर किया है। शर्मा का मानना है कि एनकाउंटर ऐक्सिडेंटल होता है। यह किया नहीं जाता, हो जाता है। पुलिस पर यदि कोई गोली चलाएगा, तो पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलाने का अधिकार है।


एकदम सही ऐक्शन लिया गया'



करीब 100 एनकाउंटर करने वाले एक दूसरे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रफुल्ल भोंसले ने एनबीटी से कहा कि जो तथ्‍य अभी तक सामने आ रहे हैं, उस आधार पर मेरा मानना है कि पुलिस ने जा ऐक्शन लिया, वह एकदम सही है। इन लोगों ने पुलिस की रिवॉल्वर निकाल ली थी। यदि पुलिस उनके खिलाफ तत्काल जवाबी कार्रवाई नहीं करती, तो यह सब भाग जाते। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इन चारों आरोपियों ने रेप जैसा संगीन अपराध किया था।


...तो पब्लिक और हिंसक हो जाती'



90 के दशक में मुंबई में लोखंडवाला में एक चर्चित एनकाउंटर हुआ था, जिसमें माया डोलस सहित आधा दर्जन अंडरवर्ल्ड आरोपी मारे गए थे। उस एनकाउंटर टीम में मुंबई एटीएस के एक सदस्य रिटायर एसीपी सुनील देशमुख भी थे। देशमुख कहते हैं कि शुक्रवार सुबह वहां पर क्या परिस्थिति थी, यह तो मुझे नहीं पता, पर यदि आरोपी भाग रहे होंगे और जब वे रेप जैसे संगीन अपराध के आरोपी थे, तो वहां उस स्थिति में जो ऐक्शन लिया गया, वह उस समय के लिए सबसे बेहतर ऐक्शन था। देशमुख के अनुसार, पूरे देश में रेप को लेकर पब्लिक का बहुत गुस्सा था। यदि रेप के आरोपी भाग जाते, तो पब्लिक हिंसक हो जाती और फिर सारा धब्बा पुलिस पर लगता।


रिटायर अफसर ने उठाए ये सवाल



हॉकीमैन के नाम से मशहूर रिटायर एसीपी वसंत ढोबले कहते हैं कि हैदराबाद एनकाउंटर के बाद मैजिस्ट्रेट जांच बैठेगी। इसमें वहां की पुलिस को यह भी साबित करना पड़ेगा कि जिन चार लोगों को उन्होंने कथित एनकाउंटर में मारा, क्या वे वाकई हैदराबाद रेप के असल आरोपी थे? ढोबले कहते हैं कि हमें अभी यह भी देखना पड़ेगा कि किन परिस्थितियों में यह एनकाउंटर हुआ। क्या वाकई पुलिस पर आरोपियों ने हमला किया था?


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