झारखंड में झटका, बिहार में बढ़ेगी बीजेपी की टेंशन?


पटना
झारखंड के चुनावी समर में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और आरजेडी के महागठबंधन को रुझानों में पूर्ण बहुमत मिलता दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली और अमित शाह की चुनावी रणनीति के बाद भी भगवा पार्टी शिकस्‍त की ओर बढ़ रही है। झारखंड चुनाव परिणाम के बाद अब लोगों की नजरें पड़ोसी बिहार पर टिक गई हैं जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

विश्‍लेषकों के मुताबिक झारखंड चुनाव परिणाम का बिहार में बीजेपी के वोटों पर बहुत खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जीत से उत्‍साहित विपक्षी आरजेडी और कांग्रेस अब आंखें दिखाना शुरू कर देंगे। बिहार की सियासत पर करीबी नजर रखने वाले स्थानीय पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक विपेंद्र कुमार ने नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन से बातचीत में कहा कि झारखंड चुनाव का बिहार पर कोई खास नहीं पड़ेगा। उन्‍होंने कहा कि झारखंड में बीजेपी के हार की एक बड़ी वजह पार्टी के अंदर चल रहा आतंरिक कलह है। ऐसी कोई समस्‍या बिहार बीजेपी में नहीं है।

'आरजेडी के पास कोई मजबूत साझेदार नहीं'
विपेंद्र कुमार ने कहा, 'झारखंड से उलट बिहार में आरजेडी के पास कोई मजबूत साझेदार नहीं है। झारखंड में जेएमएम के पास कांग्रेस जैसा मज‍बूत सहयोगी दल था। आरजेडी ने भी महागठबंधन का समर्थन किया था। अगर बिहार की बात करें तो विपक्षी दलों ने आरजेडी, कांग्रेस, आरएलएसपी, हम और वीआईपी के साथ मिलकर महागठबंधन जरूर बनाया है लेकिन लालू यादव की पार्टी को छोड़कर किसी पास जनाधार नहीं है।'

कुमार ने कहा कि झारखंड चुनाव के परिणाम से आरजेडी का मनोबल ऊंचा होगा जिसे पिछले लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्‍त का सामना करना पड़ा था। आरजेडी अब झारखंड के चुनाव परिणाम को बिहार में भी दोहराने के लिए पूरा जोर लगाएगी। इसी तरह से बिहार में सत्‍तारूढ़ बीजेपी और जेडीयू में खींचतान बढ़ सकती है। नीतीश कुमार अब ज्‍यादा सीटों के लिए बीजेपी पर और ज्‍यादा सीटों के लिए दबाव डाल सकते हैं जो नागरिकता संशोधन कानून पर केंद्र सरकार को समर्थन देकर अपने मुस्लिम वोटरों की नाराजगी का सामना कर रहे हैं।

इसी खतरे को देखते हुए झारखंड विधानसभा चुनाव में अच्छे परिणाम पाने के लिए सत्ताधारी बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। झारखंड में बिहार बीजेपी की टीम के अलावा पार्टी की केंद्रीय टीम ने डेरा डाल रखा था। बीजेपी को अपनी 'विजेता छवि' बरकरार रखने और एनडीए की मजबूती कायम रखने के लिए झारखंड विधानसभा चुनाव उसके लिए बेहद अहम थे लेकिन चुनाव परिणामों में पार्टी को झटका लगा है।

'सहयोगी दल बन सकते हैं संकट का सबब'
बिहार में अब बीजेपी के लिए उसके सहयोगी दल संकट का सबब बन सकते हैं। हरियाणा और महाराष्ट्र में आशातीत चुनाव परिणाम नहीं आने पर सहयोगी दलों ने जिस तरह अपने व्यवहार में बदलाव लाया था, उससे बीजेपी भी अवगत है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में चुनाव परिणाम आने के बाद '50-50 फॉर्म्‍युला' लागू करने पर अड़ी शिवसेना ने बीजेपी से गठबंधन तोड़ अपना अलग रास्ता अख्तियार कर लिया था। अब बिहार में सहयोगी जेडीयू और लोक जनशक्ति पार्टी भी समन्वय समिति के जरिए बीजेपी पर दबाव बना रही है।

झारखंड के राजनीतिक समीक्षक मधुकर ने कहा कि अपेक्षित चुनाव परिणाम नहीं आना बीजेपी के लिए नुकसानदेह तो है ही, छोटे दलों की बांछें भी खिल गई हैं। अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू खुद को 'कम्फर्ट जोन' में महसूस करने लगेंगे, वहीं उनका दबाव बीजेपी पर बढ़ जाएगा। झारखंड में छोटे दलों का कुनबा भी बड़ा हो गया है। इन सबका प्रतिकूल असर अब बीजेपी की छवि पर भी पड़ेगा।