केजरीवाल झूठ का प्रतीक, उनके चेहरे का हमें होगा फायदा: प्रकाश जावड़ेकर





 





नई दिल्ली
झारखंड के नतीजों के बाद अब दिल्ली चुनाव की तैयारी है। आम आदमी पार्टी को टक्कर देने के लिए बीजेपी एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, इस पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है। पार्टी दिल्ली में राष्ट्रीय मुद्दों को आधार बनाकर मैदान में उतरेगी या फिर स्थानीय मुद्दों को लेकर? सीएए और एनआरसी जैसे मुद्दों पर दिल्ली में हाल ही में हुए प्रदर्शनों का क्या असर होगा? इन सभी सवालों पर केंद्रीय मंत्री और दिल्ली के लिए बीजेपी के चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर से बात की गुलशन राय खत्री और प्रशांत सोनी ने:

राम मंदिर और धारा 370 हटाने के फैसलों के बाद झारखंड विधानसभा चुनाव में सत्ता बीजेपी के हाथ से फिसल गई। क्या इसका दिल्ली विधानसभा चुनाव पर भी असर होगा?
हर राज्य का चुनाव अलग होता है। झारखंड चुनाव नतीजों से दिल्ली का कोई ताल्लुक नहीं है। झारखंड में हार की वजह यह रही कि बीजेपी के सहयोगी दल अलग-अलग लड़े, जबकि विपक्षी दल एकजुट होकर लड़े। लेकिन अगर वोट प्रतिशत देखें तो झारखंड में बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ा है। दिल्ली अलग राज्य है और इस पर झारखंड चुनाव का कोई असर नहीं होगा।

हाल के चुनावों में देखा गया है कि राज्यों में राष्ट्रीय की बजाय स्थानीय मुद्दों पर वोटिंग हुई है। अब दिल्ली में क्या बीजेपी राष्ट्रीय मुद्दों को छोड़ स्थानीय मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी?
दिल्ली में हमारे चुनाव की दो थीम होंगी। पहली विकास बनाम विनाश और दूसरा राष्ट्रवाद बनाम अराजकता। दिल्ली में एक ओर मोदी सरकार के मंत्रालयों के वे काम हैं, जो दिल्ली के लिए किए गए हैं। पलूशन कम करने के लिए मेट्रो प्रोजेक्ट से लेकर ईस्टर्न व वेस्टर्न एक्सप्रेस वे बनाए गए हैं तो दूसरी और अनधिकृत कालोनियों के लोगों को मालिकाना हक देने जैसे फैसले हैं। लेकिन अगर विनाश की बात करें तो दिल्ली में मेट्रो को रोकने की कोशिश की गई है। उसकी राह में अड़चन डाली गई। मेट्रो फेज 4 कम से कम दो साल लेट हो गया है। यह भी दिल्ली सरकार की वजह से हुआ। पिछले पांच साल से दिल्ली की नगर निगमों का डेढ़ हजार करोड़ रुपये रोक दिया गया है। हम मोदी सरकार टू में जो काम किए गए हैं, उन्हें भी हाईलाइट करेंगे। जम्मू कश्मीर में पहली बार हुआ है कि फोर्स कम की गई है। इसे भी जनता को बताएंगे।

लेकिन केजरीवाल सरकार ने बिजली के 200 यूनिट फ्री, पानी फ्री और महिलाओं को बसों में फ्री यात्रा की सुविधा दी है। बीजेपी के पास इसका क्या जवाब है?
उन्होंने पानी माफ तो किया लेकिन साफ नहीं किया। 11 हजार बसों का वादा भी केजरीवाल ने किया था। लेकिन वह तो पूरा नहीं हुआ। सच्चाई तो यह है कि केजरीवाल सरकार दूसरों के कामों को भी अपना ही बता देती है। दिल्ली नगर निगम ने फॉगिंग की, जमकर काम किया, जिससे कि डेंगू समाप्त हुआ लेकिन क्रेडिट केजरीवाल सरकार ले रही है। अब केजरीवाल के बारे में लोगों का भ्रम टूट गया है। पिछली बार अन्ना के पुण्य को केजरीवाल ने भुनाया था। उस वक्त केजरीवाल जनलोकपाल के मुद्दे पर चुनकर आए थे, लेकिन पांच साल तक भूले रहे। उन्होंने तो वादा किया था कि सरकार में आने के बाद न गाड़ी लेंगे और न ही बंगला, लेकिन सत्ता में आते ही दोनों ले लिए।

उनका यह भी आरोप है कि मोदी सरकार अड़चन डालती रही है?
वे पौने पांच साल यही कहते रहे कि मोदी सरकार उन्हें काम नहीं करने दे रही लेकिन अब तीन महीने में ही उन्होंने कैसे कार्य कर लिए?

सीएए और एनआरसी को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों का चुनाव पर क्या असर होगा?
आप देखेंगे कि बीजेपी की भारी जीत होगी। जिस कानून की बात की जा रही है, वह तो पाक, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आने वालों को भारत में नागरिकता देने के बारे में है। इन देशों में एक समुदाय विशेष के लोग भारी संख्या में हैं। ऐसे में उन्हें तो शरणार्थी के रूप में भारत आने की जरूरत नहीं होती। हिंदू, सिख, पारसी, ईसाई आदि को ही शरणार्थी बनकर आना होता है। उन्हें नागरिकता देने के लिए यह कानून है।

लेकिन दिल्ली में बीजेपी ने अब तक यह भी घोषित नहीं किया कि केजरीवाल के मुकाबले मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन है?
हर राज्य में चुनाव की अलग रणनीति होती है। कई बार चेहरा घोषित करते हैं और कई बार नहीं भी करते। दिल्ली में हम एक टीम के रूप में लड़ रहे हैं। सातों सांसद हमारे हैं। हम सभी एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे हैं। हम चाहते हैं कि दिल्ली में ट्रिपल इंजन से काम हो। नगर निगम और केंद्र में हमारी सरकार है। अगर दिल्ली में भी बीजेपी सत्ता में आती है तो ट्रिपल इंजन की तरह ही रफ्तार से दिल्ली में विकास कार्य होंगे।

लेकिन AAP के पास अरविंद केजरीवाल का चेहरा है। क्या इससे उन्हें फायदा नहीं होगा?
मुझे तो लगता है कि अरविंद केजरीवाल के चेहरे का हमें फायदा होगा। वे झूठ का प्रतीक बन गए हैं।

लेकिन दिल्ली बीजेपी में तो नेताओं में ही मतभेद उभर कर आते रहते हैं?
आप दो तीन माह से देख रहे होंगे कि सभी नेता एक टीम की तरह काम कर रहे हैं। पूरी टीम एकजुटता से लगी हुई है। अब अनुशासन से काम हो रहा है इसलिए मुझे नहीं लगता कि कोई समस्या है।



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