नागरिकता बिल पर चर्चा के दौरान सभापति के निर्देश पर थोड़ी देर के लिए राज्यसभा टीवी ने रोका प्रसारण


नई दिल्ली
राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 पेश किए जाने के बाद जारी चर्चा के दौरान राज्यसभा टीवी ने थोड़ी देर के लिए सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण रोक दिया। जब गृह मंत्री अमित शाह ने बिल पेश करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार असम के लोगों का संरक्षण करेगी तब विपक्ष की बेंच से एक सांसद बीच में बोलने लगे। तभी सभापति वेंकैया नायडू ने उन्हें सदन की कार्यवाही बाधित नहीं करने की चेतावनी दी और कहा कि कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं जाएगा और न ही इसे दिखाया जाना चाहिए।


गृह मंत्री जब असम अकॉर्ड के क्लाउज 6 के तहत गठित कमिटी की रिपोर्ट को लेकर चर्चा कर रहे थे, तभी पक्ष की तरफ से एक सांसद की आवाज आई कि 'यह (अमित शाह जो बता रहे हैं) भ्रामक है...' सभापति ने शाह को बीच में टोकने वाले विपक्षी सांसद से कहा कि उनका व्यवहार सही नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह आचरण गलत है, कृपया बैठ जाइए। यह रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा। इसे दिखाया भी नहीं जाना चाहिए।' 


सभापति के दोबारा निर्देश पर प्रसारण रुका
राज्यसभा सभापति ने कहा, 'कुछ भी नहीं दिखाया जाना चाहिए।' सभापति के दोबारा बोलने के बाद 4-5 सेकंड के अंदर राज्यसभा का लाइव टेलिकास्ट रोक दिया गया। उसके बाद 20-22 सेकंड तक रुकने के बाद सदन की कार्यवाही का दोबारा सीधा प्रसारण शुरू हुआ। उस वक्त भी अमित शाह ही बोल रहे थे। राज्यसभा टीवी (RSTV) के सूत्रों ने बताया कि जब सभापति रेड लाइट बटन दबाते हैं तो इसका संदेश होता है कि टेलिकास्ट रोक दिया जाए।


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राजीव गांधी के वक्त हुए असम अकॉर्ड का जिक्र
दरअसल, अमित शाह नागरिकता बिल पर बोलते हुए असम की चर्चा करने लगे। उन्होंने कहा कि 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम अकॉर्ड किया। इसके तहत असम के लोगों को सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषाई पहचान और चुने हुए फोरमों में उनके प्रतिनिधित्व के अधिकार के संरक्षण के लिए क्लॉज 6 बनाया गया था। कॉल्ज 6 के अंदर एक प्रावधान था कि इस क्लॉज के जरिए भारत सरकार एक कमिटी गठित करेगी जो असम को मूल निवासियों की पहचान और उनके अधिकारों के संरक्षण सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा, '1985 से लेकर नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने तक क्लॉज 6 की कमिटी ही नहीं बनी। जब मोदी पीएम बने तब जाकर यह कमिटी बनाई गई।'

सभापति ने कहा- नामित कर देंगे
इस दौरान विपक्ष की बेंच से कुछ आवाज आई और सभापति वेंकैया नायडू बोलेत सुने गए, 'मैडम, मुझे आपका नाम लेना पड़ेगा। रानीजी बैठ जाइए। आपका मौका आएगा तो आप आराम से बोलिए।' गौरतलब है कि सभापति द्वारा नामित किए जाने पर उस सदस्य को सदन की कार्यवाही में भाग लेने से एक दिन के लिए रोक दिया जाता है।

सभापति की चेतावनी के बाद विपक्षी सांसद शांत हुईं और फिर शाह ने अपना वक्तव्य जारी रखा। उन्होंने आगे कहा, 'असम के सभी मूल निवासियों को इस सदन के माध्यम से आश्वस्त करना चाहता हूं कि एनडीए की सरकार, भारतीय जनता पार्टी की सरकार क्लॉज 6 के माध्यम से आपके सभी हितों की चिंता करेगी। इसमें बिल्कुल भी शंका नहीं है। क्योंकि यह सरकार सबका साथ, सबका विकास के आधार पर चलने वाली सरकार है।'

इसी वक्त विपक्षी सांसदों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया। हालांकि, हंगाम जोरदार नहीं था और थोड़ी ही देर में वो शांत भी हो गए। फिर शाह ने कहा, 'हम मानते हैं कि असम आंदोलन के अंतर्गत के जो शहीद हुए हैं, उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। इसलिए हमने क्लॉज 6 की कमिटी बनाई है जिसमें आसू भी है, जिन्होंने आंदोलन किया था, असम गणपरिषद के हमारे साथी भी हैं। मैं आप सबसे आग्रह करता हूं कि जितनी जल्दी हो सके, क्लॉज 6 की कमिटी की रिपोर्ट कृपया भारत सरकार को भेज दिया जिससे भारत सरकार आपके हितों की रक्षा कर सके।'

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