नागरिकता संशोधन बिल पर राज्यसभा में संग्रामः शिवसेना का मोदी पर तंज


नई दिल्ली
राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 आज गृहमंत्री अमित शाह ने पेश किया। बिल पर चर्चा जारी है। लोकसभा से बिल पास हो चुका है और आज बीजेपी की संसदीय दल की बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी बिल को ऐतिहासिक बताया। राज्यसभा में बिल के विरोध में कांग्रेस और समर्थन में सरकार की ओर से कई दिग्गज सांसद अपनी बात रख रहे हैं। LIVE पढ़ें बिल पर कौन क्या बोल रहा है...


बीएसपी सांसद सतीश चंद्र मिश्रा: आपने 3 पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के बारे में सोचा, इसके लिए बधाई देते हैं। इसके साथ-साथ आप 31 दिसंबर 2014 की डेट क्यों लगाई है? इसका जवाब जरूर जानना चाहेंगे कि यह कटऑफ डेट क्यों लगाई। इसका विरोध इसलिए कर रहे हैं कि यह संविधान की प्रस्तावना के विरोध में है।


शिवसेना सांसद संजय राउत : इस बिल के बारे में कहा जा रहा है कि जो इसका समर्थन नहीं कर रहा वह पाकिस्तान की भाषा बोल रहा है। हमारे इतने मजबूत प्रधानमंत्री हैं, गृहमंत्री है आप पाकिस्तान को सबक सिखाओ। हम पाकिस्तान हो कि कोई और हो आपका साथ देंगे। हमें कोई राष्ट्रवाद न सिखाए। जिस स्कूल में आप पढ़ रहे हैं हम उसके हेडमास्टर हैं। हमारे स्कूल के बाला साहेब ठाकरे हैं, अटल जी भी हैं, श्यामा प्रसाद मुखर्जी हैं। इस बिल का विरोध धार्मिक आधार पर नहीं मानवता के आधार पर होना चाहिए। लाखों-करोड़ों लोग को आप ला रहे हैं तो क्या उनको वोटिंग राइट दे रहे हैं।


कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम: इस देश में हमारे पास सिटिजनशिप ऐक्ट है जो नागरिकता को जन्म, रजिस्ट्रेशन, नैचरलाइजेशन आदि के आधार पर नागरिकता का निर्धारण करता है। सरकार एक नई श्रेणी ला रही है और उम्मीद कर रही है कि गैरसंवैधानिक प्रावधान को सपॉर्ट करें। हम यहां पर जनप्रतिनिधि है, लेकिन हम कुछ ऐसा कर रहे हैं जो अंसवैधानिक है।


पी. चिदंबरम : यह कोर्ट में जाएगा और वहां गैरनिर्वाचित जज और वकील फैसला करेंगे। मुझे कोई शंका नहीं है कि कोर्ट में यह कानून रद्द होनेवाला है। यह चुनी हुई जनप्रतिनिधियों की संस्था के मुंह पर न्यायपालिका का एक थप्पड़ होगा। इस बिल में कुछ अपवाद रखे गए हैं वह समझ से परे हैं। बिल में जिन 3 देशों को शामिल किया गया है श्रीलंका उनमें नहीं है। हालांकि, श्रीलंका के हिंदुओं और भूटान के ईसाई लोगों को इसमें शामिल किया गया है। फिर इसमें श्रीलंका के तमिलों को क्यों शामिल नहीं किया गया है?


कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम: सरकार हिंदुत्व अजेंडा को आगे बढ़ा रही है। यह एक बहुत दुखद दिन है। मैं सरकार को खुली चुनौती देता हूं कि वह अटर्नी जनरल और कानून मंत्रालय को बिल के प्रावधानों पर जवाब देने के लिए बाध्य करें। मुझे उम्मीद है कि न्यायपालिका इस बिल को अवैध करार देगी और आइडिया ऑफ इंडिया को बचाएगी।


तिरुचि शिवा डीएमके सांसद: देश के प्रति अपनी जवाबदेही को समझते हुए हमारी पार्टी इसके विरोध में है। सिर्फ 3 देशों को ही नागरिकता के लिए क्यों चुना गया है? जब अफगानिस्तान शामिल है तो श्रीलंका क्यों नहीं? ये तीनों देश मुस्लिम बहुल हैं क्या सिर्फ इस कारण से इन्हें शामिल किया गया?


सीपीआई (एम) सांसद टीके रंगराजन: जब आप दूसरे देश जाते हैं तो कहते हैं वसुधैव कुटुम्बकम, लेकिन जब भारत में रहते हैं तो बांटनेवाली राजनीति करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में धर्मनिरपेक्षता को संविधान का हिस्सा बताया है। यब विनाशकाले विपरीत बुद्धि है। देश के संविधान को देश के भविष्य को बर्बाद न करें।

टीआरएस सांसद के. केशव राव : हम इस बिल का विरोध कर रहे हैं क्योंकि यह मुस्लिमविरोधी है। यह संविधान और इस देश के मूल आदर्शों के खिलाफ है। इस बिल के लागू होने से लोगों के बीच में डर बढ़ेगा।


जेडीयू सांसद राम चंद्र प्रसाद सिंह : हिंदुस्तान की एक संस्कृति रही है। बार-बार एनआरसी की चर्चा करते हैं। सी से आगे बढ़िए डी है। हमारे लिए नैशनल रजिस्टर ऑफ डिवेलपमेंट हैं। टीएमसी ने हमारी नैतिकता पर सवाल उठाया, आपको बता देता हूं एनडीए सरकार ने 1 कलम से एक बार में 2460 मदरसे बनाए।


एसपी सांसद जावेद अली खान : टू नेशन थिअरी का समर्थन सावरकर और जिन्ना ने किया। आपके कई सहयोगियों ने मुस्लिम मुक्त बनाने का बयान दिया है। हमारे देश की सरकार जिन्ना का ख्वाब पूरा करने जा रही है। बार-बार गृहमंत्री ने कहा इस बिल का मुसलमानों से लेना-देना नहीं है। क्यों? मुसलमान दूसरे दर्जे के नागरिक हैं? दूसरे दर्जे के शहरी हैं?


टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन: अपनी पार्टी की तरफ से बिल के विरोध में हूं। यह बिल बंगाली लोगों के साथ भेदभाव की साजिश है। देश के अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के लिए यह बिल लाया गया है। टीएमसी को राष्ट्रवाद की सीख आपसे लेने की जरूरत नहीं है। कल पीएम मोदी ने कहा था कि यह बिल स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। कहां स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा? पाकिस्तान के राष्ट्रपिता की कब्र पर।


जेपी नड्डा: देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ। इतना बड़ा नरसंहार न पहले कभी हुआ न उसके बाद हुआ। रातों-रात लोगों को घर छोड़कर निकलना पड़ा। दोनों देशों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा हो यह इच्छा थी। उस समय पाकिस्तान में हिंदू, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध अल्पसंख्यक थे। हमें स्पष्ट रहना चाहिए कि हिंदू पाकिस्तान में अल्पसंख्यक थे। पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक की सुरक्षा की बात हम आज से नहीं कह रहे जनसंघ के दिनों से कह रहे हैं।

कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा: सरकार का कथन है कि सबसे बातचीत हो चुकी है मैं इससे सहमत नहीं हूं। आपने कहा कि यह ऐतिहासिक बिल है तो इतिहास इसे किस दृष्टि से देखेगा, यह वक्त बताएगा। हम इसका विरोध करते हैं। विरोध का कारण राजनैतिक नहीं संवैधानिक है, नैतिक है। यह बिल संविधान की मूल आत्मा पर आघात है। यह हमारे गणराज्य के पवित्र संविधान की प्रस्तावना के विरुद्ध है। पार्टिशन की पीड़ा पूरे देश को थी। क्या आज हम यह कथन कहना चाहते हैं कि संविधान निर्माताओं को नागरिकता को लेकर कोई समझ नहीं थी। बंटवारे की पीड़ा से जो लाखों लोग भारत आए क्या उन्हें सम्मान नहीं मिला? भारत में दो-दो प्रधानमंत्री भी हुए डॉक्टर मनमोहन सिंह और आई के गुजराल।


आनंद शर्मा : आपने बंटवारे का दोष कांग्रेस के उन नेताओं पर लगाया जिन्होंने सालों जेल में बिताए। हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग ने बंटवारे का समर्थन किया, कांग्रेस तो हमेशा उसके विरोध में थी। आप कहते हैं राजनीति नहीं होनी चाहिए तो यह राजनीति भी नहीं होनी चाहिए। महात्मा गांधी के नेतृत्व में वह लड़ाई लड़ी गई उसमें पटेल, सुभाष चंद्र बोस तक शामिल हैं। उनके योगदान को नकारना इतिहास को नकारना है। आपको उनके विचारों से जो भी परहेज हो, लेकिन उनके योगदान को न नकारें।


आनंद शर्मा: आपने इतिहास लिखने का किसी को प्रॉजेक्ट दिया है तो कृपा कर ऐसा न करें। औपचारिक रूस से सावरकर ने घोषणा की थी कि जिन्ना के टू नेशन थिअरी से मुझे कोई आपत्ति नहीं है। चुनाव घोषणा पत्र किसी भी पार्टी का हो संविधान से बड़ा नहीं होता है। गांधी और पटेल का सिर्फ नाम न लें, गांधी का नाम सिर्फ विज्ञापन के लिए नहीं लें। अगर वो आज होते तो प्रधानमंत्री से मिलकर दुखी होते।

गृहमंत्री अमित शाह : मैं इस गरिमामय सदन के सामने नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश कर रहा हूं। दशकों तक पीड़ित समुदाय ने जो नारकीय जीवन जीया है। दोनों पाकिस्तान पूर्वी पाकिस्तान जो मौजूदा दौर में बांग्लादेश हैं की आबादी में घोर कटौती हुए। कहां गए वो अल्पसंख्यक? उन प्रताड़ित लोगों को न्याय मिलना चाहिए था, लेकिन दशकों से नहीं मिला। ये बिल उन सभी लोगों को नागरिकता देने का अधिकार लेकर आया है।


अमित शाह : प्रतिपक्ष के लोगों को कहना चाहता हूं कि इस बिल को पक्ष-विपक्ष की राजनीति के तौर पर न देखें। लाखों-करोड़ों लोगों को प्रताड़ित किया गया है उनके लिए कल का सूरज स्वर्णिम होगा, उनकी खुशी में शामिल हों। यह भ्रम फैलाया जा रहा रहा है कि मुसलमानों के विरोध में है। मुसलमानों के लिए नागरिकता का प्रावधान नहीं है। पूरी दुनिया से मुसलमान आएं क्या हम उनको नागरिकता दें? तो देश कैसे चलेगा? धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर जो लोग आए हैं उनको नागरिकता देने का प्रावधान है किसी भी मुसलमान को डरने की जरूरत नहीं है।


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