प्रियंका की सुरक्षा में सेंध पर रॉबर्ट वाड्रा नाराज, बोले- ये बहुत बड़ी चूक, एसपीजी बिल्कुल नहीं हटानी चाहिए थी


जयपुर. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षा में बड़ी खामी सामने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। मंगलवार सुबह जयपुर पहुंचे रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि ये बहुत बड़ी चूक है। केंद्र सरकार को गांधी परिवार से एसपीजी सुरक्षा बिलकुल नहीं हटाना चाहिए थी। उन्होंने ये भी कहा कि वह इससे ज्यादा देश की महिलाओं की सुरक्षा को महत्व देना चाहेंगे। देश के सभी लोग हमारे साथ हैं। रॉबर्ट का जयपुर से अजमेर जाने का कार्यक्रम है।


उन्होंने कहा कि इस मामले पर गृह मंत्रालय से कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला है। ये लोग (केंद्र सरकार) जो चाहते हैं, वो करते हैं। ये सिर्फ पॉलिटिकल एजेंडा है। एसपीजी बिल्कुल नहीं हटानी चाहिए थी। हैदराबाद की घटना पर कहा- जो गलत करेगा, उस पर तुरंत फैसला होना चाहिए। ऐसा करने से लोगों में डर पैदा होगा। 


देश की महिलाओं की सुरक्षा प्राथमिकता में होना चाहिए


वाड्रा ने कहा कि केंद्र और स्टेट लेवल पर हमें महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान देना होगा। हमारे परिवार और बच्चों की सिक्योरिटी सेकंड लेवल पर है। पहले महिलाओं की सुरक्षा के बारे में सोचना है।


क्या है मामला


26 नवंबर को प्रियंका गांधी वाड्रा के लोधी एस्टेट स्थित सरकारी आवास में मेरठ के परिवार के 7 लोग कार से पहुंच गए थे। उन्होंने प्रियंका के साथ सेल्फी लेने की इच्छा जाहिर की। उस समय आवास पर प्रियंका और उनके बच्चे मौजूद थे। सोमवार को प्रियंका के कार्यालय ने सीआरपीएफ से इस चूक की शिकायत की। इसके बाद पूरी सुरक्षा टीम को बदल दिया गया है। पिछले महीने केंद्र ने गांधी परिवार से एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली थी।


गांधी परिवार को 28 साल तक एसपीजी सुरक्षा मिली
प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई 1991 को लिट्टे द्वारा हत्या करने के बाद से गांधी परिवार को एसपीजी सुरक्षा मिली थी। सितंबर 1991 में 1988 के एसपीजी एक्ट में संशोधन किया गया। इसके बाद सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वीवीआईपी सुरक्षा सूची में आ गए थे। हाल ही में 27 नवंबर को लोकसभा में एसपीजी एक्ट में संशोधन का बिल पारित किया गया। इस तरह गांधी परिवार से 28 साल बाद एसपीजी की सुरक्षा हटाई गई है। नए संशोधन के मुताबिक, अब प्रधानमंत्री और उनके सरकारी आवास में रह रहे पारिवारिक सदस्यों को ही एसपीजी सुरक्षा मिलेगी। यह सुरक्षा पद छोड़ने के पांच साल तक प्रधानमंत्री और उनके साथ सरकारी आवास में रह रहे पारिवारिक सदस्यों को मिलेगी।


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