रेकॉर्ड तेजी से बन रहे हैं नैशनल हाइवे लेकिन रखरखाव के लिए नहीं हैं पैसे!



 

नई दिल्ली
सरकार पिछले साढ़े 5 सालों में जहां तेजी से नैशनल हाइवे बना रही है, 2018-19 में 30 किलोमीटर प्रति दिन का नया रेकॉर्ड बन चुका है लेकिन उनका रखरखाव चिंता की बात बनी हुई है। इसकी एक मुख्य वजह रखरखाव के लिए जरूरी फंड के मुकाबले आबंटित बजट का बहुत कम होना है। हाल के वर्षों और 2018-19 में सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव के लिए असल में जितने फंड की जरूरत है, उसका महज 35 प्रतिशत ही आबंटित किया है।

संसदीय समिति ने दिया 'मेंटिनंस चार्ज' लगाने का सुझाव
ट्रांसपोर्ट, टूरिजम और संस्कृति से जुड़ी संसदीय समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में यह सवाल उठाया है कि हाइवेज के रखरखाव को वित्त मंत्रालय तवज्जो क्यों नहीं दे रहा है। पैनल ने सिफारिश की है सरकार चाहे तो फ्रेट ट्रैफिक यानी गुड्स कैरियरों पर 'मेंटिनंस चार्ज' लगाने पर विचार कर सकती है ताकि उन पैसों का इस्तेमाल नैशनल हाइवेज के रखरखाव और मरम्मत के लिए किया जा सकता है।

NHs के रखरखाव के लिए पैसे की कमी!























सालआनुमानित जरूरतआबंटन
2016-177,000 करोड़ रुपये2,847 करोड़ रुपये
2017-188,500 करोड़ रुपये2,967 करोड़ रुपये
1018-198,600 करोड़ रुपये3,017 करोड़ रुपये


जरूरत का महज 35-40 प्रतिशत ही आबंटन
पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, '2016-17 में हाइवेज के रखरखाव के लिए जितने फंड की जरूरत का अनुमान था उसका सिर्फ 40 प्रतिशत ही आबंटित किया गया। 2017-18 और 2018-19 में यह जरूरत का सिर्फ 35 प्रतिशत रहा। समिति यह नहीं समझ पा रही है कि वित्त मंत्रालय सड़कों के रखरखाव को उतना तवज्जो क्यों नहीं दे रहा, जितना देना चाहिए।'

नई सड़कों को बनाने से जरूरी मौजूदा सड़कों का रखरखाव: पैनल
संसदीय समिति ने यह भी कहा है कि मौजूदा सड़कों के रखरखाव को नई सड़कों को बनाने से ज्यादा प्राथमिकता जी जानी चाहिए क्योंकि खराब रखरखाव की वजह से सड़क हादसे होते हैं और सफर में देरी भी होती है। इसे लेकर रोड ट्रांसपोर्ट ऐंड हाइवेज मिनिस्ट्री का कहना है कि सरकार उन नैशनल हाइवेज के स्ट्रेच के मेंटिनंस के लिए फंड देती है जिन्हें किसी प्रोग्राम के तहत कवर नहीं किया गया है या फिर पूरा हुआ स्ट्रेच ऐसा है जहां मेंटिनंस की जिम्मेदारी कॉन्ट्रैक्टर की नहीं है।



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