रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक ने 30 हजार मकान खरीदारों के साथ की ठगी


नई दिल्ली
रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक ने आशियाने का सपना देखने वालों की खून-पसीने की कमाई को पचाने के लिए ठगी के तमाम पैंतरे आजमाए। केवल होमबायर्स ही नहीं, बल्कि बैंकों को भी कंपनी ने बेहद सफाई से चूना लगाया। यह खुलासा कंपनी की फॉरेंसिक ऑडिट में सामने आया है। यूनिटेक लिमिटेड की फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि होम बायर्स और बैंकों द्वार निवेश की गई रकम का इस्तेमाल मकान का निर्माण करने में नहीं, बल्कि उन्हें टैक्स हैवेन देशों में भेज दिया गया।

29,800 बायर्स को लगाया चूना

कुल 29,800 होमबायर्स ने मकान खरीदने के लिए लगभग 14,270 करोड़ रुपये यूनिटेक के पास जमा कराए और कंपनी ने 74 हाउजिंग प्रॉजेक्ट्स को पूरा करने के लिए छह वित्तीय संस्थानों से 1,805.86 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। यूनिटेक ग्रुप तथा उसकी सहायक कंपनियों के बही-खातों की जांच करने के बाद ऑडिटर्स ने बताया है कि होमबायर्स से लिए गए कुल 40% (5,063 करोड़ रुपये) रकम का इस्तेमाल मकान बनाने में नहीं किया गया, जबकि 2,389 करोड़ रुपये कहां गए इसका पता लगाना अभी बाकी है।

होमबायर्स के 40% रकम का घपला
ऑडिटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय संस्थानों से ली गई लगभग 40% (763 करोड़ रुपये) रकम का इस्तेमाल मकानों के निर्माण के लिए नहीं किया गया। ऑडिटर्स ने 51 प्रॉजेक्ट्स की जांच करने के बाद रिपोर्ट फाइल की है और बाकी 23 प्रॉजेक्ट्स का अभी तक विश्लेषण नहीं किया गया है, क्योंकि कंपनी इन प्रॉजेक्ट्स से जुड़े डेटा उपलब्ध कराने में विफल रही है। यह फॉरेंसिक रिपोर्ट यूनिटेक ग्रुप की जांच का आदेश देने वाली न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ तथा एम. आर. शाह की पीठ ने ऑडिट की रिपोर्ट को सौंपी गई।

रकम रिट ऑफ करने का गेम
रिपोर्ट में फंड्स के संभावित डायवर्जन की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा गया है कि विदेशी टैक्स हैवेन (काला धन छिपाने का सुरक्षित पनाहगाह देशों) में भारी-भरकम रकम का निवेश किया गया, जिसे बाद में राइट-ऑफ कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2007-2010 के बीच यूनिटेक की तीन सहायक कंपनियों ने साइप्रस में 10 कंपनियों में 1,745.81 करोड़ रुपये का निवेश किया। साल 2016-2018 के बीच 1,406.33 करोड़ या कुल निवेश के 80% हिस्से को राइट-ऑफ कर दिया गया, जबकि बाकी 339 करोड़ रुपये की रकम बही-खातों में इक्विटी इन्वेस्टमेंट्स के रूप में दिख रही है।'

समझें सहायक कंपनियों का खेल
रिपोर्ट में कहा गया है, 'इसी तरह, साल 2007-2008 में जर्सी में रजिस्टर्ड कंपनी यूनिटेक ग्लोबल लिमिटेड तथा एक और सहायक कंपनी न्यूवेल लिमिटेड की एक सहायक कंपनी ने कॉर्टेल लिमिटेड से 294.47 करोड़ रुपये का कर्ज लिया, जो खुद यूनिटेक की एक सहायक कंपनी है। कॉर्टेल ने साल 2015-2016 के बीच साइप्रस की तीन कंपनियों में 292.99 करोड़ रुपये (कुल निवेश वैल्यू का 100%) का निवेश किया। कॉर्टेल ने इन सभी रकम को अपने बही-खातों से रिट ऑफ कर दिया।'

मुखौटा कंपनियों की बड़ी भूमिका
फॉरेंसिक ऑडिटर्स ने बताया कि साल 2009-2011 के बीच यूनिटेक ने अपने पूर्ण स्वामित्व वाली पांच कंपनियों को 493.72 करोड़ रुपये में तीन कंपनियों को बेच दिया, जिसमें यूनिटेक को 294.30 करोड़ रुपये हासिल हुए। हालांकि, बही-खातों में इन तीनों कंपनियों के नामों का जिक्र नहीं किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 'मार्च 2011 से लेकर अक्टूबर 2013 तक यूनिटेक ने 237.63 करोड़ रुपये का कर्ज अपनी ही कंपनी मिलेनियम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को दिया। यह कर्ज एक कंपनी में ग्रैंड्यूर बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से शेयर खरीदने के लिए दिया गया। लेकिन, यूनिटेक को किसी शेयर का आवंटन नहीं किया गया और पूरा कर्ज अभी भी बकाया है।' रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फंड्स का डायवर्जन उन कंपनियों को भी किया गया है, जिनके नाम का खुलासा नहीं किया गया है।