भारत के साथ कारोबार पर झूठ बोल रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप?


नई दिल्ली
अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन 1999-2000 में भारत आए थे। तब से लेकर 31 मार्च, 2019 को खत्म हुए वित्त वर्ष तक भारत का अमेरिका को निर्यात छह गुना बढ़कर 52.4 अरब डॉलर पर पहुंचा तो अमेरिका से भारत का आयात 10 गुना बढ़कर 35.6 अरब डॉलर हो गया। 19 वर्षों में अमेरिका से भारतीय आयात उसके निर्यात के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ा, फिर भी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप खुश नहीं हैं।


ट्रंप अपनी पहली आधिकारिक यात्रा से पहले कह चुके हैं कि भारत ने उनके साथ ठीक नहीं किया है। स्वाभाविक है कि इसके पीछे उनकी मंशा समझौते की टेबल पर भारत को दबाव में रखने की है। वह ज्यादा-से-ज्यादा अमेरिकी उत्पादों को भारतीय बाजार में उतारना चाहते हैं जबकि अमेरिका में भारतीय उत्पादों और यहां के सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के प्रवेश को सीमित कर रहे हैं।


भारत को दिया टैरिफ किंग का तमगा
ट्रंप भारत पर आयात शुल्क की ऊंची दरों के जरिए अमेरिका को जबर्दस्त झटका देने का आरोप लगाते रहे हैं। वह भारत पर 'टैरिफ किंग' का तमगा लगा चुके हैं। ट्रंप प्रशासन ने पिछले वर्ष जून महीने में भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) लिस्ट से भी निकाल दिया था। उसने GSP की सुविधा बहाल करने के लिए भारत के साथ कड़ा तोल-मोल किया।

नेताओं के बीच रिश्ते अच्छे, फिर भी गतिरोध

भारत व्यापारिक मोर्चे पर अमेरिका के साथ बीते 18 महीनों में से शांति कायम रखने की कोशिश में जुटा है। मोदी 2.0 सरकार बनने के बाद इस पहल को और गति दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाजर के साथ अच्छे ताल्लुकात के बावजूद दोनों देश ट्रेड डील को अंजाम देने में असफल रहे हैं। पीएम मोदी पिछले वर्ष सितंबर में न्यू यॉर्क में थे, तब दोनों देशों के बीच ट्रेड डील की पूरी रूपरेखा तैयार थी, लेकिन धरातल पर नहीं उतारा जा सका।


भारत ने दिखाई उदारता
उस वक्त चिकित्सा उपकरणों पर पेच फंस गया था। गतिरोध नहीं टूटता देख भारत अमेरिकी स्टेंट और घुटना प्रत्यारोपण (नी इंप्लांट) को फायदा पहुंचाने के मकसद से विशेष व्यवस्था की। साथ ही, महंगे अमेरिकी मोटरसाइकलों और खाद्य उत्पादों पर आयात शुल्क घटा दिया गया। भारत ने अमेरिकी बादाम और सेब पर आयात शुल्क तब बढ़ाया था जब अमेरिका ने भारतीय ऐल्युमीनियम और स्टील पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी थी।

अमेरिका के साथ FTA की चाहत
भारत ने अमेरिका के साथ मुक्त व्यापारिक समझौता (FTA) करना चाहता है। इसने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के संभावित विशाल व्यापारिक गुट क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) से खुद को अलग कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी महत्वाकांक्षाएं और बढ़ी हैं। जवाब में भारत ने भी अपनी मांगें बढ़ा दी हैं। मसलन, भारत सरकार ने जानवरों के खान-पान के उत्पाद के आयात की अनुमति दे दी तो अमेरिका इन उत्पादों पर कम आयात शुल्क रखने की भी मांग करने लगा।

खुद पीएम मोदी को कहना पड़ा- अब नहीं

अमेरिका यहीं नहीं रुका और उसने भारत की नरमी को कमजोरी मानकर अपने अन्य उत्पादों पर भी इसी तरह की जिद करनी शुरू की। वह उन मुद्दों को भी उठाना शुरू किया जिसे सुलझाया जा चुका था। दबाव बनाकर फायदा उठाने की अमेरिकी मंशा भांपकर भारत ने जनवरी महीने में कमर कसने की ठान ली। कहा जा रहा है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के अंदर अपना स्टैंड क्लियर कर दिया।


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