दिल्ली चुनाव: डटे रहेंगे केजरीवाल या इस बार चौंका देंगे नतीजे?


नई दिल्ली
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को मतदान होने जा रहा है। इस पहले तीनों प्रमुख दलों, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस ने अपनी-अपनी जीत दावे कर डाले हैं। एक तरफ आप अपने काम के दम पर सत्ता में वापस आने की गारंटी दे रही है तो दूसरी तरफ बीजेपी का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत तमाम पार्टी दिग्गजों की रैलियों ने दिल्ली में हवा का रुख उसकी तरफ मोड़ दिया है। वहीं, कांग्रेस का दावा है कि दिल्ली के वोटर्स इस बार सबको अचंभे में डालने वाले हैं और उन्होंने कांग्रेस का साथ देने का मन बना लिया है।


दक्षिणी दिल्ली के गोविंदपुरी से लेकर कैंटोनमेंट तक के इलाके में घूमते हुए वोटरों के बीच आम आदमी पार्टी (आप) के लिए एक वाक्य अक्सर सुनने को मिला, 'काम तो किया है।' कुछ लोग तो झाड़ू को वोट करने का खुला ऐलान भी करते दिखे। राष्ट्रीय राजधानी के एक इलाके में कुछ दर्जन लोगों से प्राप्त इस नमूनों लगता है कि मतदाताओं के बीच अपनी सरकार के कामों का बखान करते रहने की सीएम अरविंद केजरीवाल की रणनीति बहुत हद तक असर करती दिख रही है। वहीं, शाहीन बाग, सीएए और टुकड़े-टुकड़े गैंग पर बीजेपी के विशेष जोर से उसे बहुत फायदा होता नहीं दिख रहा है। ज्यादातर लोग मानते हैं कि सीएए विरोधी प्रदर्शन गलत हैं, लेकिन उनका यह भी मानना है कि इसका दिल्ली विधानसभा चुनाव से कुछ खास लेनादेना नहीं है। 


बदल चुका है हवा का रुख: बीजेपी
हालांकि, बीजेपी अपने आंतरिक सर्वे के नतीजों पर गदगद दिख रही है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि बीते सोमवार को देर शाम कराए गए सर्वे में बीजेपी को जहां 27 सीटें मिलती दिख रही हैं, वहीं आप को 26 और कांग्रेस को 8 से 9 सीटें मिलती दिख रही हैं। सर्वे के मुताबिक, बाकी सीटों पर बेहद कड़ा मुकाबला हो सकता है और नतीजे किसी के भी पक्ष में जा सकते हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक, यह सर्वे सोमवार की रैली के बाद है जबकि मोदी ने मंगलवार की शाम को भी पश्चिमी दिल्ली के द्वारका इलाके में एक और बड़ी चुनावी रैली को संबोधित किया। ऐसे में उस रैली के बाद माहौल के और बदलने की संभावना जताई जा रही है। खासतौर से वेस्ट दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में बीजेपी की स्थिति और सुधरने की उम्मीद है।

केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिन कहा कि दिल्ली विकास चाहती है। उन्होंने एक निजी न्यूज चैनल से बातचीत में दावा किया कि बीजेपी 70 में से 45 सीटें जीतकर सरकार बनाएगी। वहीं, मंगलवार को द्वारका की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कह चुके हैं कि वोटिंग से 4 दिन पहले बीजेपी के पक्ष में ऐसा माहौल कई लोगों की नींद उड़ा रहा है।


मोदी पीएम ठीक, सीएम तो केजरीवाल ही'
हालांकि, दक्षिणी दिल्ली के नमूनों की बात की जाए तो ज्यादातर लोगों ने कहा कि उन्होंने पिछले साल लोकसभा चुनाव में मोदी को वोट दिया और आगे के लोकसभा चुनाव में भी वो मोदी को ही वोट करेंगे, लेकिन दिल्ली के लिए तो केजरीवाल ही ठीक है। ज्यादातर लोगों ने बेहिचक यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी तो इस लड़ाई में कहीं है नहीं। वो कहते हैं कि कांग्रेस के कुछ उम्मीदवार अपने दम पर कुछ करामात दिखा दें तो अलग बात है, वैसे पार्टी का सफाया होना तय है।

चौंका देंगे नतीजे: कांग्रेस
हालांकि, कांग्रेस पार्टी का दावा है कि 11 फरवरी को चौंकाने वाले रिजल्ट आएंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस दिल्ली में उसी तरह से सबको चौंका सकती है, जैसे पिछले साल हरियाणा में किया था। सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा में कुछ चैनल कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें दे रहे थे, लेकिन हमने 31 सीटें जीतीं। यह फिर से होने जा रहा है। केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी और दिल्ली की सत्ता पर काबिज आप को 'झूठों की सरकार और झूठों के सरदार' बताते हुए सुरजेवाला ने उन पर दिल्ली में स्वास्थ्य, प्रदूषण से राहत देने, शिक्षा, पीने के साफ पानी की आपूर्ति और सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में नाकाम रहने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दहशत में हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इस बार भी बीजेपी तीन से ज्यादा सीटें नहीं जीत सकती है।

आप को अपने इन कामों पर भरोसा
इधर, आप अपने जिन कामों पर भरोसा कर रही है और जिनकी जनता के बीच भी गाहे-बगाहे चर्चा हो रही है, वो वोटरों को झाड़ू का बटन दबाने पर कितना मजबूर कर सकेंगे, यह देखना काफी दिलचस्प होगा। दिल्ली की बड़ी आबादी के बिजली-पानी के बिल बहुत कम आर रहे, कुछ के तो आ ही नहीं रहे। महिलाओं के लिए बस सेवा मुफ्त हो चुकी है। कई लोगों ने केजरीवाल सरकार के इन कामों को सीधा वोट बटोरने वाला कारक बताया। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें हर महीने डेढ़ से दो हजार रुपये बच रहे हैं जबकि कुछ ऐसे भी लोग हैं जो साढ़े चार हजार रुपये तक प्रति माह बचत का दावा करते हैं।

हौज रानी इलाके में मुस्लिम और हिंदू, दोनों समुदाय के कुछ बुजुर्गों ने सरकारी स्कूलों की खूब तारीफ की। उनमें कुछ ने तो यहां तक कहा कि उनके बच्चे पहले प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन अब उन्हें लगता है कि बच्चों को दिल्ली सरकार के स्कूलों में भेजने में भी कोई हर्ज नहीं है। इसी तरह, कई लोग स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की बातें भी खुले मन से स्वीकार करते हैं। मालवीय नगर के एक फल विक्रेता विक्की को ही ले लीजिए। उसने बीजेपी को वोट देने की ठान रखी है, लेकिन जब उसके बगल वाले नारियल विक्रेता ने कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधरी है तो विक्की इसका विरोध नहीं कर सका।

इन मोर्चों पर ढीली दिखी केजरीवाल सरकार
सड़कें, नालियां और हैंड पंपों की स्थिति से ज्यादातर लोग पर्याप्त संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन चुनाव से कुछ महीने पहले इन मोर्चों पर भी काम होने लगा है। लोगों के बीच यह धारणा भी बनी है कि आप के विधायक लोगों के पहुंच में हैं और उनसे बिना बिचौलिये की मदद के मिला जा सकता है। हालांकि, यह विधायकों की व्यक्तिगत छवि का मामला है।


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