पहले उर्दू में हटाकर संस्कृत में लिखा देहरादून रेलवे स्टेशन का नाम, फैसला वापस लेने में मचा बवाल


देहरादून
उत्तराखंड के रेलवे स्टेशन का नाम साइन बोर्ड पर उर्दू भाषा की जगह संस्कृत में लिखने और फिर इसे उर्दू में ही करने पर रेलवे अधिकारी सवालों के घेरे में हैं। आरोप है कि राजधानी देहरादून के रेलवे स्टेशन में भाषा बदलाव को लेकर रेलवे विभाग अपने ही रेलवे मैन्युअल का उल्लंघन कर रहा है। रेलवे विभाग का नियम कहता है कि किसी भी राज्य की दूसरी स्थानीय भाषा को उस रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर लिखना अनिवार्य होगा। बता दें कि जब देहरादून यूपी का हिस्सा था तो दूसरी भाषा उर्दू ही थी, जिस वजह से उर्दू में नाम लिखे गए थे।


पिछले महीने जनवरी में रेलवे विभाग के अधिकारियों ने देहरादून के रेलवे स्टेशन की भाषा को लेकर एक पत्र जारी किया था। यह पत्र उत्तराखंड के रेलवे स्टेशनों से लगने वाले तमाम जिलों के जिलाधिकारियों को भी भेजा गया था। इस पत्र में जिलाधिकारियों से उनके रेलवे स्टेशनों के संस्कृत में शुद्ध उच्चारण मांगे गए थे। देहरादून के तत्कालीन जिलाधिकारी सी. रविशंकर ने देहरादून का संस्कृत में अनुवाद करके रेलवे विभाग को उपलब्ध करा दिया था। 


संस्कृत शिक्षक संघ ने दी धमकी
इसके बाद रेल विभाग ने देहरादून के रेलवे स्टेशन के बोर्ड में संस्कृत में देहरादूनम् नाम लिख भी दिया गया था, लेकिन कुछ समय बाद संस्कृत नाम हटाकर फिर से उर्दू में लिख दिया गया। अब देहरादून में इसके विरोध में बुधवार को संस्कृत महाविद्यालय शिक्षक संघ ने स्टेशन निदेशक को ज्ञापन दे दिया। दोनों संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने कहा कि अगर दो दिन के अंदर स्टेशन पर लगे साइन बोर्डों पर संस्कृत भाषा में देहरादून का नाम नहीं लिखा तो संस्कृत शिक्षक संघ खुद ही लिख देगा।

उर्दू में नाम नहीं हटाया जाएगा

संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामभूषण बिजल्वाण और ब्राह्मण सेवा समिति के अध्यक्ष अरुण कुमार शर्मा ने स्टेशन निदेशक को ज्ञापन दिया। स्टेशन निदेशक ने कहा कि राज्य की दूसरी भाषा में ही स्टेशन का नाम लिखा जा सकता है। संस्कृत में नाम उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा था। इसका जवाब नहीं मिला है। ऐसे में तय नहीं कि संस्कृत में नाम कैसे लिखा जाना है।

हालांकि, उन्होंने उर्दू से नाम हटाए जाने की बात से इनकार किया। रेलवे के जनसम्पर्क अधिकारी की ओर से कहा गया है कि किसी भी रेल स्टेशन के नाम में संस्कृत को अतिरिक्त भाषा के तौर पर नाम में शामिल तो किया जा सकता है, लेकिन उर्दू को हटाया नहीं जाएगा।


Popular posts
मिलिए अभिनेत्री और मिस इंडिया बिकिनी 2015 निकिता गोखले से, जो इंस्टाग्राम सनसनी हैं
Image
इरफान के निधन पर गहलोत का ट्वीट- वे राजस्थान के सबसे प्रतिभाशाली एक्टर्स में से एक थे, वसुंधरा राजे ने लिखा- एक एक्टर जो उत्कृष्ट थे
Image
धर्म स्थल खोलने के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बनेगी कमेटी -मुख्यमंत्री ने की धर्म गुरू, संत-महंत एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा
Image
नहर में मिला अज्ञात युवक का शव, पानी से बाहर निकालने से लेकर मोर्चरी में बर्फ लगाकर रखने तक का कार्य पुलिस ने ही किया
Image
भारत-चीन में हुई लेफ्टिनेंट जनरल लेवल बातचीत
Image