दक्षिण कोरिया ने दुनिया को दिखाया कैसे वैश्विक महामारी पर पाया जा सकता है काबू-लॉकडाउन पर नहीं, एहतियात पर जोर


दुनिया के टॉप फाइव सबसे अधिक संक्रमित देशों में रहे दक्षिण कोरिया ने कोरोना से लड़ाई की नई राह दिखाई है। पिछले महीने 10 दिन के भीतर ही मामलों में तीन गुनी वृद्धि हो गई थी और ऐसा लग रहा था कोरिया में वायरस भयानक तबाही मचाएगा। यह वायरस धार्मिक बैठकों से निकली थी जिसके बाद उसके आयोजकों ने 2.12 लाख सदस्यों के नाम और महत्वपूर्ण सूचना सार्वजनिक करने का फैसला किया था। 25 फरवरी को हुए इस समझौते के बाद से लेकर अब तक 3.2 लाख लोगों का कोरोना टेस्ट किया गया है जो दक्षिण कोरिया में इसके प्रसार को रोकने में सबसे कारगर माना गया है। दक्षिण कोरिया में 8,799 लोग संक्रमित पाए गए हैं और 104 लोगों की मौत हुई है।


लॉकडाउन पर नहीं, एहतियात पर जोर


चीन से बाहर दक्षिण कोरिया ऐसा देश था जहां मामले तेजी से बढ़ते जा रहे थे, लेकिन कोरिया की प्रतिक्रिया ने इसपर काबू पा लिया। वहीं, अब चीन के बाहर यूरोप में यह सबसे अधिक फैला हुआ है। कोरिया के उपायों की तुलना अमेरिका और यूरोपीय देश से की जा रही थी। यहां कोई लॉकडाउन नहीं था, कार्यस्थल खुले हुए हैं। स्कूल भी अप्रैल की शुरुआत में खुल जाएंगे। दरअसल, सीडीसी ज्यादा से ज्यादा लोगों की टेस्टिंग पर ध्यान दे रहे था।


कोरिया ने दिखाई राह


कोरिया ने डागू शहर में चर्च के सदस्यों की सबसे पहले टेस्टिंग शुरू की और फिर उन लोगों की जो उनके सम्पर्क में आए थे। कोरिया के अनुभव ने दिखाया है कि कैसे महामारी को रोका जा सकता है। खुद अमेरिका के फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन के पूर्व चीफ ने माना है कि दक्षिण कोरिया ने जिस तरह से प्रभावी रूप से महामारी रोकने में कदम उठाए वे किसी ने नहीं उठाए। उनका कहना है कि उसने व्यापक स्तर पर टेस्टिंग की। जिसमें अनुभव स्वास्थ्यकर्मियों का साथ मिला। उन्होंने कहा, 'अमेरिका को दक्षिण कोरिया कसे सीख लेने की जरूरत है।'


हर दिन 20 हजार लोगों का टेस्ट


कोरिया में कोरोना का पहना मामला 4 फवरी को आया। 27 फरवरी तक देश की चार कंपनियां टेस्टिंग किट बना रही थीं और हर दिन 20 हजार लोगों को टेस्ट किया गया। जुंग की टीम इसपर बारीकी से नजर रखी हुई है। जगह-जगह फोन बूथ की साइज का स्टेशन बनाया गया है।


कौन हैं कोरिया की 'हीरो' जुंग


जुंग सोल के उपनगरीय इलाके में फैमिली डॉ़क्टर के रूप में काम करती थीं। इसके बाद 1995 में उन्होंने नैशनल हेल्थ मिनिस्ट्री को जॉइन किया। एच1एन1 संक्रमण के वक्त 2009 में उन्हें पदोन्नति देते हुए आपातकालीन केयर डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी दी गई। इस वायरस से 7.5 लाख लोग संक्रमित हो गए थे। इसके बाद उन्हें सीडीसी का चीफ बना दिया गया। हालांकि, सीडीसी को एमईआरएस से निपटने में नाकाम रहने पर काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी। इस वायरस के प्रभाव के 6 साल बाद वह सीडीसी की चीफ बनाई गईं।


उनकी कार्यकुशलता के लोग मुरीद हैं और उनकी काफी सराहना की जा रही है। सीडीसी के पूर्व निदेशक का कहना है कि इस स्थिति में जुंग से बेहतर काम और कोई नहीं कर सकता। यह काम सिर्फ ज्ञान से नहीं हो सकता, उनके पास पुराना अनुभव भी है और उन्हें पता है कि क्या किया जा सकता है और क्या नहीं।