कोरोना वायरस: मजदूरों का पलायन- अब जिले-जिले और गांव-गांव निगरानी करेगी सरकार


नई दिल्ली
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश भर में 21 दिन का लॉकडाउन जारी है, लेकिन इस मेडिकल इमर्जेंसी के बावजूद दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों से अपने-अपने गांव लौटने के लिए मजदूरों का पलायन जारी है। ऐसे में केंद्र ने भी नए सिरे से अपनी कमर कस ली है। सरकार इन बड़े शहरों से घर लौट रहे लोगों की सेहत पर कड़ी निगरानी रखने के लिए गांव-गांव और जिला स्तर पर अपनी नजर रखेगी। इस पलायन से हाई रिस्क पर पहुंचने वाले इलाकों की सरकार ने जिला और गांवों के स्तर पर पहचान कर ली है।


महामारी को फैला सकते हैं मजदूर
सरकार को आशंका है कि इतने बड़े स्तर पर लोगों की भीड़ निकल रही है ऐसे में कहीं कुछ लोग भी कोविड-19 वायरस के शिकार हुए तो वे इस महामारी को समाज में फैलाने वाले कैरियर साबित हो सकते हैं। हजारों की संख्या में मजदूर वर्ग के ये लोग हाइवे किनारे पैदल मार्च करते हुए अपने घरों की ओर चल दिए हैं। इस पलायन के चलते कोरोना वायरस को फैलने से रोकने पर सरकार की यह नई बड़ी चिंता है।

सरकार को रणनीति में लाना होगा बदलाव
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने इस चुनौती के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है। एनसीडीसी को जानकारी मिली है कि अपने घर लौटने वाले इन मजदूरों की तादात उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान से है। सरकार ने इन जिलों को 'हाई रिस्क' का टैग दे दिया है। मजदूरों के इस पलायन के बाद सरकार को अब अपनी रणनीति में तेजी से बदलाव लाना होगा। इसके तहत इंटिग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) यानी कि इस महामारी की निगरानी तंत्र को इन राज्यों में पहले से और भी ज्यादा मुस्तैद करना होगा।

मजदूरों के पलायन की जो मौजूदा स्थिति है, उसमें लॉकडाउन के बावजूद इन लोगों में सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) को बनाए रखना संभव नहीं है। ऐसे में इन बातों से इनकार नहीं किया जा सकता कि ये लोग एक-दूसरे के संपर्क में नहीं आए होंगे। एक सीनियर अधिकारी ने बताया, 'इन लोगों में अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और काम को लेकर चिंता थी और लॉकडाउन की यह स्थिति अभी कब तक चलेगी इसके प्रति भी तस्वीर कुछ साफ नहीं है।'

सरकार करेगी मॉनिटरिंग
अब सरकार की नई चिंता यह है कि इस घातक वायरस की रोकथाम के लिए देश भर में जारी लॉकडाउन के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में इन लोगों के पलायन करने से इसकी संभावनाएं बहुत बढ़ गई हैं कि इनमें से कई लोग इस वायरस के कैरियर (ढोने वाले) साबित हो सकते हैं, जिससे इसके फैलने का खतरा और बढ़ गया है।

अगर ऐसा हुआ तो एक बड़ी चुनौती यह भी होगी कि ग्रामीण इलाकों में कोविड-19 से लड़ने के इंतजाम सीमित ही हैं। ऐसे में सरकार ने IDSP के तहत इन लोगों की मॉनिटरिंग की रणनीति बनाई है। इस निगरानी के लिए बनाई गईं रैपिड रेस्पॉन्स टीमें इनके गंतव्य स्थान और सफर के दौरान भी इनकी सेहत पर कड़ी निगरानी रखेंगी।


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