कोविड-19 का कहर: जानें कोरोना फाइटर्स की आपबीती, यूं बचाई जिंदगी की डोर


वाशिंगटन
वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना वायरस की चपेट में अब दुनिया के 185 देश आ चुके हैं। भारत समेत पूरे विश्‍व में कोरोना वायरस से करीब पौने तीन लाख लोग संक्रमित हैं और 11 हजार से अधिक लोग अपनी जान गवां चुके हैं। कोरोना वायरस से खौफ का आलम यह है कि ग्‍लोबल लॉकडाउन जैसी स्थिति बन गई है। डर के इस माहौल में आइए हम आपको कुछ ऐसी कहानियों से रू-ब-रू कराते हैं जिन्‍होंने कुछ दवाओं और दृढ़ इच्‍छाशक्ति के बल पर इस महामारी को मात दी....


सुसान काले की आपबीती, बचा ली पति की जिंदगी
अमेरिका के वाशिंगटन राज्‍य में कोरोना वायरस ने आतंक मचा रखा है। कोरोना से जंग में वाशिंगटन से एक अच्‍छी खबर आई है। गुरुवार को एक महिला ने अपना निजी अनुभव शेयर करते हुए बताया कि ऐंटी वायरल दवा remdesivir की मदद से उनके पति कोरोना से ठीक हो गए। दरअसल, अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि रेमडेसिविर एक ऐसी दवा है जिससे कोरोना के खात्‍मे की संभावना देखी जा रही है। इसके बाद उन्‍होंने इस दवा को देने का फैसला किया।

महिला सुसान काने ने बताया कि उनके पति फ्लोरिडा से लौटने के बाद कोरोना से संक्रमित हो गए थे। जब उन्‍हें पता चला कि यहां एक स्‍थानीय अस्‍पताल में remdesivir दवा को दिया जा रहा है तो वह इसे अपने पति को देने की इच्‍छुक थीं। सुसान ने कहा, 'जब मेरे पति बहुत बीमार होने लगे तो मैंने बस यह सोचा कि अब उन्‍हें कहां ले जाऊं। कई अस्‍पतालों में ले गई लेकिन उन्‍होंने मना कर दिया। इसके बाद मैं उन्‍हें स्‍थानीय मेडिकल सेंटर में ले गई जहां एक मरीज ठीक हो गया था।'

सुसान को इस बीमारी ने जकड़ लिया था लेकिन उनके ऊपर इसका ज्‍यादा प्रभाव पड़ा नहीं था। उन्‍होंने बताया, 'मेरे पति को सोमवार को भर्ती कराया गया। उन्‍हें मंगलवार को दवा की पहली खुराक दी गई। बुधवार को उनके स्‍वास्‍थ्‍य में बहुत नाटकीय तरीके से बदलाव आया। उनका बुखार 103 से गिरकर 100 के अंदर आ गया। उसी रात को उनके सीने में महसूस होने वाला दबाव भी कम हो गया।' सुसान ने कहा कि उनके पति की हालत 'हर दिन' सुधर रही है।

कोरोना को हराने वाले दिल्ली के पहले मरीज की कहानी
दिल्ली में कोरोना का शिकार बने पहले मरीज ठीक होकर सफदरजंग हॉस्पिटल से घर पहुंच गए। इनका नाम रोहित दत्ता (45) है, जो मयूर विहार फेज-2 के रहने वाले हैं। एनबीटी से खास बातचीत में कहा कि अब मैं स्वस्थ हूं और मेरे शरीर से संक्रमण भी दूर हो चुका है। यह मेरे लिए नई जिंदगी में कदम रखने जैसा अहसास है। लोग कोरोना से ज्यादा डरें और घबराएं नहीं। सावधानी बरतें और अपने स्वास्थ्य और सफाई का विशेष ध्यान रखें।

रोहित ने बताया कि आइसोलेशन वॉर्ड किसी भी प्राइवेट वॉर्ड के वीआईपी रूम से बेहतर था। वहां सादा और बेहतर खाना मिलता था। घरवालों से बात भी करता था। नेटफ्लिक्स पर दो फिल्में देखीं। चाणक्य की किताबें पढ़ीं। न्यूज फॉलो की, सोशल मीडिया पर देख रहा था कि क्या चल रहा है। रोहित ने बताया कि होली का दिन उनके लिए जरूर थोड़ा मायूसी भरा था, क्योंकि वह पहली बार इस दिन अपने परिवार से दूर अकेले अस्पताल में थे। हालांकि फोन पर सबसे बात हो रही थी, लेकिन एक खालीपन सा भी लग रहा था। उसी दौरान कुछ ऐसा हुआ कि उनकी पूरी मायूसी दूर हो गई।

उन्होंने अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह भी दी है। उनका कहना है कि अगर आप घर में छुपकर बैठे हुए हैं, तो फिर अपने और अपने परिवार के लिए गलत कर रहे हैं। ये एक ऐसी बीमारी है, जिसमें आपको सही दवाई और डॉक्टर का सही सुपरविजन मिलने पर आप पूरी तरह फिट होकर लौट सकते है। यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है और मैं इसका जीता जागता उदाहरण हूं।

'20 दिन घर में रहे कैद, पूरे दिन मुट्ठीभर खाया खाना'
दिल्‍ली के छावला में आईटीबीपी के क्वारंटाइन सेंटर में 14 दिन का गुजारने के बाद चीन से आई जुआन ने बताया कि यहां आकर उसे शुरुआती दिनों में कुछ मुश्किलें हुईं। दोस्त नहीं थे, छोटी बच्ची डर रही थी, वो खेल नहीं पा रही थी, बार-बार रोती थी, लेकिन इसके बावजूद यह दिन चीन में बिताए दिनों से काफी बेहतर थे। जुआन ने बताया कि हाल ही में इटली से भी एक ग्रुप को लाया गया जिनमें कुछ कोरोना वायरस के पॉजिटिव केस थे। यहां खौफ का माहौल बन गया था। लोग अपनी खिड़कियां बंद करके रहने लगे थे लेकिन इटली के इस ग्रुप को जल्द ही यहां से शिफ्ट कर दिया गया, जिसके बाद माहौल फिर से अच्छा होने लगा।

जुआन के पति अभिषेक ने बताया कि चीन में सुपर मार्केट खुले थे लेकिन डर इतना अधिक था कि हम घर में ही कैद हो कर रहे। घर में जो खाना था हम बस वही खाकर काम चला रहे थे। कुछ दिनों तक तो हमने पूरे दिन में बस मुट्ठी भर खाना खाया ताकि हम जिंदा रह सकें। हमने चीन में करीब 20 दिन इस तरह कांटे हैं। 8 साल की हमारी बेटी तान्या खेलने के लिए परेशान थी। रात में उठकर रोती थी। उसे स्कूल याद आ रहा था। यह चीजें हमें और अधिक परेशान कर रहीं थीं लेकिन आईटीपीबी कैंप में आने के बाद सब बदल गया।