प्रधानमंत्री मोदी ने चीन से एयरलिफ्ट किए गए स्टूडेंट और पुणे की नर्स से फोन पर की बात


नई दिल्ली
पूरा देश कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जंग लड़ रहा है। डॉक्टर, नर्स और मेडिकल स्टाफ लगातार 24 घंटे इस महामारी से निपटने के लिए देवदूतों की तरह लगे हुए हैं। ऐसे में अगर इन कोरोना योद्धाओं के पास अचानक देश के प्रधानमंत्री का फोन जाए, तो निश्चित तौर पर उनका हौसला और बढ़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी तरह कोरोना वायरस से जंग में डटे फ्रंटलाइन वॉरियर्स की हौसलाफजाई कर रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने पुणे के नायडू हॉस्पिटल की नर्स से फोन पर बात की और उनके जज्बे को सलाम कर हौसला बढ़ाया। इसी तरह, चीन के वुहान शहर से एयरलिफ्ट कर लाए गए एक छात्र के पास शनिवार को अचानक प्रधानमंत्री मोदी का फोन गया।


प्रधानमंत्री मोदी लगातार कोरोना योद्धाओं की हौसलाफजाई कर रहे हैं। वह फार्मा से लेकर इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट मीडिया के प्रतिनिधियों और रेडियो जॉकी से विडियो कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। शनिवार को उन्होंने सिलसिलेवार एक के बाद एक कई ट्वीट करके संकट की इस घड़ी में रेडियो की बड़ी भूमिका के बारे में बताया। ऐसे ही एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने लिखा कि इस वक्त हमें लोगों की चिंताओं को कम करने और उनमें सकारात्मकता बढ़ाने की जरूरत है। इसे करने में रेडियो एक बड़ी भूमिका निभा सकता है। 


प्रधानमंत्री मोदी ने पुणे की नर्स छाया जगताप को फोन किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज कर रहे महाराष्ट्र के सरकारी नायडू अस्पताल की एक नर्स को फोन किया। उन्होंने इस महामारी से लड़ने में अस्पताल के कर्मचारियों के काम की तारीफ की। पुणे महानगरपालिका के स्वास्थ्य अधिकारी ने शनिवार को बताया कि नर्स छाया जगताप को शुक्रवार की शाम को प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आया। सोशल मीडिया पर उनकी बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग वायरल हो गई है।


मराठी भाषा में बातचीत शुरू करते हुए पीएम मोदी ने जगताप से कुशल-क्षेम पूछी। साथ ही प्रधानमंत्री ने पूछा कि वह पूरी लगन से कोविड-19 के मरीजों का इलाज करते हुए अपनी सुरक्षा के बारे में परिवार के डर को कैसे दूर कर रही हैं। जगताप ने कहा, 'हां, मैं अपने परिवार को लेकर चिंतित हूं लेकिन काम तो करना पड़ेगा। हमें इन हालात में मरीजों का इलाज करना होगा। मैं संभाल रही हूं।' प्रधानमंत्री ने उससे पूछा कि क्या अस्पताल में भर्ती मरीज डरे हुए हैं। इस पर नर्स ने कहा, 'हम उनसे बात करते हैं। हमने उनसे कहा है कि डरने की जरूरत नहीं है । हमने उन्हें आश्वासन दिया है कि उन्हें कुछ नहीं होगा।' 


ऑडियो क्लिप में जगताप को कहते हुए सुना जा सकता है कि कर्मचारी संक्रमित मरीजों का हौसला बढ़ाने की कोशिश करते हैं। जगताप ने प्रधानमंत्री को बताया कि कोविड-19 के 7 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। जब प्रधानमंत्री ने पूछा कि क्या वह तमाम अस्पतालों में बिना थके लगातार काम कर रहे लाखों चिकित्साकर्मियों को कोई संदेश देना चाहती हैं, इस पर जगताप ने कहा, 'डरने की कोई जरूरत नहीं है। हमें इस बीमारी से बाहर निकलना होगा और हमें अपने देश को जिताना होगा। यह अस्पताल और कर्मचारियों का उद्देश्य होना चाहिए।' पीएम मोदी ने जगतप की लगन और सेवा के लिए उन्हें बधाई दी। 


प्रधानमंत्री ने कहा, 'आपकी तरह लाखों नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, डॉक्टर सच्चे तपस्वी हैं और अभी देश में तमाम अस्पतालों में मरीजों की सेवा कर रहे हैं। मैं आपको बधाई देता हूं। मुझे आपके अनुभव सुनकर खुशी हुई।' इस पर आभार जताते हुए जगताप ने कहा, 'मैं सिर्फ अपना काम कर रही हूं लेकिन आप चौबीसों घंटे देश की सेवा कर रहे हैं। हम आपके आभारी हैं।' उन्हें ऑडियो क्लिप में यह कहते सुना जा सकता है, 'देश सौभाग्यशाली है कि उसके पास आपके जैसा प्रधानमंत्री है।' नायडू अस्पताल पुणे के अधिकतर कोविड-19 मरीजों का इलाज कर रहा है। 


चीन से एयरलिफ्ट किए गए कश्मीरी छात्र को पीएम ने मिलाया फोन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के वुहान शहर से पिछले दिनों लौटे कश्मीरी छात्र निजामउर रहमान से शनिवार को फोन पर बात की। रहमान ने पीएम को बताया कि वुहान में स्थिति भयंकर है। वह वुहान में 60 अन्य कश्मीरी छात्र के साथ मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। उसने भारत सरकार का और पीएम मोदी का शुक्रिया अदा किया और कहा समय रहते उनको और उनके मित्रों को वुहान शहर से सुरक्षित निकाल लिया गया।


जब पीएम मोदी ने निजाम उर रहमान से अपना अनुभव साझा करने को कहा कि तो निजाम ने बताया कि 14 दिन अलग-थलग रहने के दौरान उन्हें कोई समस्या नहीं हुई, उन्हें अच्छा खाना दिया गया, खेलने को गेम्स दिए गए। इसलिए जो लोग क्वारंटीन के दौरान रहते हैं वो डरे नहीं। पीएम मोदी ने निजाम उर रहमान से कहा कि वह चूंकि मेडिकल की पढ़ाई करते हैं तो ऐसे में लोगों को लॉक डाउन के के महत्व के बारे में बताएं और समझाएं। चीन का वुहान शहर कोरोना वायरस का केंद्र रहा है। माना जा रहा है कि चीन के इस शहर से पूरे विश्व में इस वायरस का प्रसार हुआ। कश्मीर के 60 छात्र वुहान में ही मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन भारत सरकार से गुहार लगाने के बाद इन लोगों को सुरक्षित भारत लाया गया और 14 दिन के आइसोलेशन की जरूरी प्रकिया के बाद इन्हें अपने घरों को भेज दिया गया है। 


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