कोरोना संकटः इन देशों में सरकारें कैसे कर रही हैं कर्मचारियों की मदद


कोरोना संकटः इन देशों में सरकारें कैसे कर रही हैं कर्मचारियों की मददकोरोना प्रकोप के कारण कामकाज ठप पड़े हैं। इस मुश्किल दौर में दुनिया के तमाम देशों की सरकारें अपने कर्मचारियों की मदद के लिए आगे आई हैं। अस्थायी वेतन सब्सिडी प्लान के माध्यम से सरकारें उन तमाम कंपनियों की मदद कर रही हैं जिनपर इस वक्त ताला लगा है। एक अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक द आर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-आपेरेशन एंड डेवलपमेंट ने करीब 100 देशों से एस तरीके की पॉलिसी का एक डेटा तैयार किया है। 5 देशों में लागू अस्थायी वेतन सब्सिडी प्लान कुछ इस प्रकार हैं.....


​ब्रिटेन: सुनक-राब की जोड़ी दे रही यह राहत


ब्रिटेन में ऐसे कर्मचारी जिनका काम ठप पड़ गया है वे अपने वेतन के 80 प्रतिशत अनुदान के लिए आवेदन कर सकते हैं जिसके तहत महीने में अधिकतम 2 लाख 39 हजार तक मदद की जा सकती है। ये उन पर लागू है, जो 19 मार्च से परोल पर हैं। 1 मार्च से ब्रिटेन सरकार द्वारा ये अस्थायी स्कीम लागू की गई है जो कम से कम तीन महीने तक चलेगी।
सिंगापुरः सरकार देगी 75 प्रतिशत सैलरी


सरकार अप्रैल के लिए प्रत्येक कर्मचारी को 75 प्रतिशत सैलरी का भुगतान करेगी जो अधिकतम 2 लाख 47 हजार तक होगी। वहीं आगे के महीनों के लिए ये वेतन स्कीम अलग-अलग सेक्टर के लिए अलग होगी। विमानन, टूरिज्म को 75 प्रतिशत तो फूड सर्विस को 50 प्रतिशत और बाकी सभी सेक्टर को 25 प्रतिशत का वेतन भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा।
कनाडा: जिम्मेदारी के अनुसार फायदा


मार्च, अप्रैल के में प्राइवेट बिजनस के राजस्व में 30 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में 15 मार्च से लेकर 6 जून तक वेतन के लिए ये अस्थायी प्लान लागू किया गया जिसमें प्रत्येक कर्मचारी को उसके रोल के हिसाब से अधिकतम 46 हजार का फायदा हर हफ्ते मिल सकेगा। वहीं, लघु उद्योगों को अधिकतम फायदा दिया जाएगा।
बुल्गारिया: कंपनियों को वेतन भुगतान


बुल्गारिया में सरकार जनता के हाथ सीधे पैसे नहीं पहुंचा रही है। बल्कि कंपनियों को सरकार भुगतान में मदद करेगी। इस फैसले के तहत तीन महीने के वेतन के भुगतान की 60 प्रतिशत राशि वह कंपनियों को देगी।
डेनमार्क: तीन महीने तक 75 फीसदी सैलरी


डेनमार्क में तीन महीने के लिए सरकार ने कर्मचारियों की 75 प्रतिशत महीने की सैलरी (अधिकतम 2 लाख 57 हजार रुपए) के भुगतान की बात कही है। ये उन कर्मचारियों के लिए है जिनके मालिक ने उन्हें सैलरी देने से मना कर दिया है। 25 प्रतिशत सैलरी की चिंता कंपनी मालिकों की होगी। वहीं आम मजदूरों के लिए सरकार ज्यादा पैसा खर्च करेगी।