कोरोना संक्रमित हुए तो देने होंगे 4.5 लाख रुपये , फिलिपींस में फंसे राजस्थानी स्टूडेंट्स का दर्द



जयपुर।
फिलिपींस में यदि आपको कोरोना का संक्रमण हो जाता है। तो आपको इलाज के लिए 3.5 लाख पेसो यानी लगभग 4.5 लाख रूपए आवश्यकता पड़ेगी। अगर हमारे पास इतना पैसा होता, तो हम अपने देश से ही एमबीबीएसस कर लेते। इस बात का ड़र हमेशा लगता है कि यदि पॉजिटिव पाए गए, तो यहां इलाज करवाना भी हमारे लिए मुश्किल होगा। फिलिपींस से एमबीबीएस कर रहे सीकर के भरत प्रताप सिंह शेखावत ने इसी तरह अपना दर्द बयान किया। कोरोना संकट के बीच फिलिपींस में फंसे भरत प्रताप की इस बात से पता लगाया जा सकता है कि कोरोना के चलते दूसरे देशों में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना संक्रमण के चलते क्योंकि सभी इंटरनेशनल फ्लाइट्स बंद हो चुकी है। ऐसे में कई राजस्थानी स्टूडेंट्स और आम नागरिकों के लिए अब अपने देश लौटना भी मुश्किल हो गया है। विदेशों में फंसे राजस्थानी स्टूडेंट्स अपना दर्द बयान कर रहे हैं, जिससे जल्द से जल्द उन्हें राहत पहुंचाकर उनके स्वदेश लौटने का रास्ते साफ हो। मिली जानकारी के अनुसार फिलीपींस में एक हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स इन दिनों फंसे हुए हैं और मदद की गुहार लगा रहे हैं।


100 राजस्थानी स्टूडेंट्स ने की थी कोशिश
भरत ने बताया कि कोरोना के संकट को देखते हुए हम 100 राजस्थानी स्टूडेंटस ने भारत लौटने के प्रयास किए थे। जब हम एयरपोर्ट पहुंचे, तो देखा सभी फ्लाइट्स कैंसिल है। हमने इंडियन एंबेसी से संपर्क करने की भी कोशिश की। लेकिन कुछ नहीं हुआ। भरत ने आगे बताया कि फिलिपींस में अब मास्क और सेनेटाइजर भी मिलना मुश्किल हो गया है। वहीं अब यहां सब्जियां और राशन के दाम भी अब आसमान छूनने लगे हैं। सोमवा को जब मैं मार्केट गया, तो एक आलू 106 रुपए का बिक रहा था।



बिजनेस 15 दिनार से एक दिनार पर आया
इसी तरह बहरीन में रह रहे चूरू के जावेद हुसैन का कहना है कि कोरोना के चलते उनका बिजनेस यहां पूरी तरह ठप्प को चुका है। जावेद का कहना है कि वो यहां लॉड्ररी चलाते हैं, जिसकी कमाई अब 15 से सीधे एक दिनार पर पहुंच चुकी है। अब सर्वाइव करना मुश्किल हो गया है। अब भारत सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे है कि कब वो हमें यहां से निकालते हैं। इसी तरह न्यूजीलैंड में फंसे राजस्थान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रश्मि और सुधीर रानीवाला का भी कहना है कि मार्च में सरकार की ओर से कोई ट्रेवल एडवाइजी जारी नहीं की। 22 तारीख का लॉकडाउन हमारे लिए पूरी तरह चौंकाने वाला था। अब न्यूजीलैंड में हम एक रिलेटिव के यहां रूके हैं और जल्द लौटने का इंतजार कर रहे हैं।