कोरोना से कम नहीं थे अतीत के ये महासंकट

कोरोना वायरस से पैदा हुई त्रासदी ऐसी है जिसे पीढ़ियां याद रखेंगी। हालांकि, एक तथ्य यह भी है कि हर दौर में किसी-न-किसी रूप में ऐसी त्रासदियां सामने आती रही हैं जिन्होंने मानवता को महासंकट में डाला है। आइए कुछ ऐसी ही त्रासदियों से रू-ब-रू हों जिनकी कभी कल्पना नहीं की गई थी और वो हो गईं। अब उनके बारे में पढ़कर या बुजुर्गें से जानकर रोम-रोम सिहर उठता है...



कोरोना से कम नहीं थे अतीत के ये महासंकट



2019 का सुखाड़


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पिछले साल देश की करीब 42% खेती की जमीन सुखाड़ की चपेट में आ गई थी। आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर-पूर्व के कुछ इलाके, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्य सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए। यानी, इन राज्यों की कुल 50 करोड़ आबादी पर सुखाड़ का असर हुआ। 50 करोड़ यानी देश की करीब 40% आबादी।




​उत्तर भारत की बाढ़- 2013


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जून 2013 में उत्तर भारत में भारी बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड में बाढ़ और भूस्खलन से घनघोर तबाही मची। बाढ़ के कारण जान-माल का भारी नुकसान हुआ और सैकड़ों लोग बाढ़ में बह गए और हजारों लोग बेघर हो गए। 24 जून 2013 के अनुसार इस भयानक आपदा में 5 हजार से ज्यादा लोग मारे गए। सबसे ज्यादा तबाही रूद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ में हुई। केदारनाथ मंदिर का मुख्य हिस्सा और सदियों पुराना गुंबद तो सुरक्षित रहा, लेकिन प्रवेश द्वार और आस-पास के सारे इलाके या तो बह गए या पूरी तरह तबाह हो गए।




​2001 का गुजरात भूकंप


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26 जनवरी, 2001 को आए भूकंप में 30 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे और तकरीबन 10 लाख लोग बेघर हो गए थे। इस भूकंप से सबसे ज्यादा भुज और अहमदाबाद जिले प्रभावित हुए थे। करीब 4 लाख मकान जमींदोज हो गए थे।




​आजादी और देश विभाजन- 1947


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1947 में जब देश आजाद हुआ। देश ने इस आजादी की बड़ी कीमत चुकाई। अंग्रेजों ने भारत का बंटवारा कर पाकिस्तान बना दिया। पाकिस्तान से भारत और भारत से पाकिस्तान विस्थापित होने के क्रम में जबर्दस्त मारकाट मची। मानवता के इतिहास की इस त्रासदी के बारे में जानकर आज भी कलेजा मुंह को आ जाता है। बंटवारे के कारण करीब 1.5 करोड़ लोगों को विस्थापन का शिकार होना पड़ा था। अलग-अलग आंकड़े बताते हैं कि उस वक्त 2 लाख से 20 लाख लोग तक मारे गए थे।




​बंगाल का अकाल- 1943


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बंगाल के अकाल में तीस लाख से ज्यादा भारतीय भूख से मर गए। इधर, बंगाल की जनता भूख से मर रही थी, उधर ब्रिटिश सरकार अनाज और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुएं सेना को भेज रही थी। ऐसी त्रासदी के बीच सरकार ने चावल का आयात रोक दिया था।




​ओडिशा में सुखाड़- 1866


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1866 में ऐसा अकाल पड़ा जिसने 10 लाख से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी। तब हमारा देश अंग्रेजों का गुलाम था। ईस्ट इंडिया कंपनी ने कपड़ा उद्योग को बर्बाद कर दिया। बड़ी तादाद में लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर करने लगी और खेती मॉनसून पर। 1866 में मॉनसून ने दगा दिया तो इतिहास की एक बड़ी त्रासदी सामने आई।




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