कोरोना वायरस से जंग: भारत के लिए धड़कनें बढ़ाने वाला है यह हफ्ता


नई दिल्ली
भारत में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस को लेकर मौजूदा हफ्ता बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है। अप्रैल महीने के दूसरे हफ्ते यानी मौजूदा हफ्ते में यह तय होगा कि देश में कोरोना वायरस का संक्रमण स्थिर होता है या नहीं। सरकारी अधिकारियों से मिले डेटा के अनुसार दिल्ली के तबलीगी जमात के कारण भारत में कोरोना वायरस इस समय तेजी से फैलाव की स्थिति में है।


9 मई के बाद सुधर सकते हैं हालात
भारत सरकार के एक शीर्ष सरकारी डेटा विश्लेषक प्रयोगशाला के अनुमान के अनुसार, भारत में कोरोना वायरस का अंतिम चरण नौ मई से शुरू होना चाहिए। बता दें कि प्रयोगशाला ने यह अनुमान देशभर में जरूरी चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने वाली एक ताकतवर सरकारी पैनल के साथ साझा भी किया है। यह पैनल महामारी रोकने में जुटी एजेंसियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी करता है।


ऐसे निकाला गया संक्रमण को लेकर अनुमान
बता दें कि प्रयोगशाला ने यह अनुमान अतिसंवेदनशील-संक्रमित- ठीक हुए (SIR) मॉडल पर लगाया है। हालांकि अभी तक इसका पता नहीं चल सका है कि तबलीगी जमात द्वारा फैलाए गए संक्रमण की सीमा कहां तक है। यह अनुमान घरेलू डेटा और चीन सहित सबसे ज्यादा संक्रमित देशों के अध्ययन के बाद निकाला जाता है। इन अनुमानों को महामारी के प्रसार को रोकने में लगी एजेंसियों के साथ रणनीति बनाने के लिए साझा भी किया जाता है।

तबलीगी जमात ने बढ़ाया संक्रमण की दर
भारत में जब कोरोना का संक्रमण स्थिर होने की ओर बढ़ रहा था तभी दिल्ली के तबलीगी जमात के मामले ने देश के कई हिस्सों में इसे तेजी से बढ़ा दिया। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, देश में अभी कोरोना वायरस का मामला बेकाबू नहीं हुआ है और 21 दिनों का लॉकडाउन खत्म होने के बाद इसके थमने की संभावना भी ज्यादा है।

डेटा विश्लेषण से लॉकडाउन को खत्म करने में मिलेगी मदद
अधिकारियों के अनुसार, डेटा विश्लेषणों से निकले अनुमान से हमें लॉकडाउन की स्थिति को आसान करने की योजना बनाने में मदद मिलेगी। हालांकि, लोगों को अब भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का कड़ाई से पालन करने की जरुरत है।


तबलीगी प्रकरण के बाद अनुमानों में हो रहा है संशोधन
कोरोना वायरस के प्रसार को लेकर एक विस्तृत विश्लेषण सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों के लिए किया जा रहा है। इस डेटा विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली में कोरोना वायरस का प्रभाव 8 अप्रैल से घटने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन तबलीगी जमात प्रकरण के कारण इन अनुमानों में संशोधन किया जा रहा है।

प्रभावित राज्यों में धीमी हो सकती है संक्रमण की दर
बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक महाराष्ट्र में भी अगर संक्रमण और सोशल डिस्टेंसिंग के पालन करने की दर यही रही तब यहा भी आने वाले दिनों में उत्साहजनक नतीजे देखने को मिल सकते हैं। वहीं अन्य बड़े राज्यों जैसे तमिलनाडु, राजस्थान और कर्नाटक में इस महीने के अंत तक संक्रमण की दर स्थिर हो सकती है।


तापमान में वृद्धि का संक्रमण की दर पर पड़ेगा प्रभाव
वैश्विक आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर और कई समितियों के साथ साझा की गई जानकारी बताती है कि तापमान में वृद्धि वायरस के प्रसार को धीमा करने में मदद कर सकती है। लेकिन, सूत्रों ने आगाह किया कि मॉडल की सटीकता में काफी बदलाव आ सकता है क्योंकि बड़ी संख्या में संदिग्ध मामले ऐसे भी हैं जिनकी पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।


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