प्लाज्मा थेरपी-विरोधाभासों के बीच क्यों फंस रही कोरोना से लड़ाई?


मुंबई
कोरोना वायरस का संक्रमण देश में तेजी से बढ़ रहा है। आलम ये है कि लॉकडाउन के बावजूद रोजाना हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में महामारी से जंग को प्लाज्मा थेरपी से उम्मीद की किरण दिख रही थी। इसी बीच ICMR के एक बयान से कोरोना के खिलाफ लड़ाई फंसती नजर आ रही है। ICMR ने आगाह करते हुए कहा कि अगर इसके इस्तेमाल में कोई चूक हुई तो यह मरीजों के लिए जोखिम भरा भी हो सकता है। जब तक इसे मंजूरी नहीं मिल जाती है तब तक इसका इस्तेमाल न करें। ऐसे में बड़ा सवाल है कि जब प्लाज्मा थेरेपी नुकसानदायक है तो राज्यों को इसकी अनुमति कैसे दी गई ? मौजूदा समय में देश के कई प्रदेशों में प्लाज्मा थेरपी के इस्तेमाल की बातें सामने आईं थी।

बता दें स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि वर्तमान में प्लाज्मा थेरपी प्रायोगिक स्तर पर है और अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इसका इस्तेमाल COVID-19 के उपचार के रूप में किया जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में कोविड -19 के लिए कोई उपचार नहीं हैं और यह दावा करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि प्लाज्मा थेरपी का उपयोग बीमारी के इलाज के लिए किया जा सकता है।


ICMR ने हमें अनुमति दी है: महाराष्‍ट्र
उधर, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे का कहना है -'मैंने नहीं सुना है कि आईसीएमआर ने आज प्लाज्मा थेरेपी पर क्या सुझाव दिया है। लेकिन मुझे पता है कि ICMR ने हमें अनुमति दी, इसके बाद ही हम इसे प्रायोगिक आधार पर कर रहे हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि प्लाज्मा थेरेपी से हमने दो मरीजों पर अच्छे परिणाम देखे हैं।' 
देश में कई जगहों पर शुरू हो गई थी प्लाज्मा थेरपी
देश के कई प्रदेशों में प्लाज्मा थेरपी के इस्तेमाल की बातें सामने आने लगी थी। दरअसल, सबसे पहले दिल्ली के एक निजी अस्पताल ने दावा किया था कि उनके यहां भर्ती कोरोना का एक मरीज प्लाज्मा थेरपी से बिल्कुल ठीक हो गया जबकि उसकी हालात बेहद नाजुक हो चुकी थी। उसको वेंटिलेटर पर रखा गया था। लेकिन बाद में वह बिल्कुल ठीक हो गया और उसकी लगातार तीन रिपोर्ट भी निगेटिव आई थी। इसके बाद यूपी के केजीएमयू में भी एक संक्रमण मुक्त डॉक्टर ने एक मरीज को प्लाज्मा डोनेट किया। महाराष्ट्र, हरियाणा में भी प्लाज्मा थेरपी से मरीज ठीक होने की बात की जा रही थी लेकिन अब सरकार ने इस पर प्रश्‍नचिह्न लगा दिया है।


क्या होती है प्लाज्मा थेरपी
प्लाज्मा थेरेपी में कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुके व्यक्ति के खून से प्लाज्मा निकालकर उस व्यक्ति को चढ़ाया जाता है, जिसे कोरोना वायरस का संक्रमण है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि जो व्यक्ति कोरोना के संक्रमण से मुक्त हो चुका है, उसके शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। जब इसे कोरोना से जूझ रहे मरीज को चढ़ाया जाता है, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। 


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