बच गई उद्धव की कुर्सी-महाराष्ट्र का सियासी संकट टला



महाराष्ट्र का सियासी संकट टला, जानें हर सवाल का जवाबपहले बॉलिवुड ऐक्टर इरफान खान और फिर ऋषि कपूर के निधन से महाराष्ट्र में पिछले दो दिन सन्नाटे में बीत गए। गुरुवार तक मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे  की कुर्सी पर मंडरा रहे खतरे के बाद शुक्रवार सुबह पूरी तरह छंट गए। चुनाव आयोग ने राज्य में एमएलसी चुनाव  को हरी झंडी दे दी है। आयोग ने 21 मई को विधान परिषद चुनाव कराए जाने की घोषणा की है। इन सबके बीच उद्धव ठाकरे शुक्रवार सुबह राज्यपाल कोश्यारी से मिलने पहुंच गए। आइए तफ्सील से समझते हैं महाराष्ट्र की सियासत के इस अहम घटनाक्रम को:
क्यों खतरे में थी उद्धव की कुर्सी?


उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर 2019 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। संविधान के अनुच्छेद 164 (4) के मुताबिक, किसी भी मंत्री को (मुख्यमंत्री भी) पद की शपथ लेने के छह महीने के अंदर किसी विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य निर्वाचित होना अनिवार्य है। उद्धव ठाकरे बिना चुनाव लड़े ही सीधे सीएम बने हैं, ऐसे में उन पर यह नियम लागू होता है। उन्हें 27 मई 2020 से पहले परिषद में चुने जाने की आवश्यकता है।
​कोरोना ने बिगाड़ दिया था गणित


इस बीच जनवरी 2020 में विधान परिषद की दो सीटों के लिए चुनाव हुए थे लेकिन उद्धव ठाकरे चुनाव नहीं लड़े। 24 मार्च को विधान परिषद की धुले नांदुरबार सीट पर उपचुनाव होना था। 24 अप्रैल को विधान परिषद की 9 और सीटें खाली हो गईं। ऐसे में उद्धव ठाकरे ने उम्मीद लगाई थी कि वह इनमें से किसी एक सीट से चुनाव जीत जाएंगे और मुख्यमंत्री बने रहेंगे। इसी बीच कोरोना वायरस ने सारा गणित बिगाड़ दिया। आखिरकार चुनाव आयोग ने 9 सीटों पर एमएलसी चुनाव का रास्ता साफ करते हुए उद्धव को राहत दी है।
​चुनाव आयोग के फैसले से उद्धव को राहत


इसके बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे चाहते थे कि राज्यपाल अपने कोटे की खाली पड़ी दो सीटों में से एक पर उन्हें नामित कर दें। इसके लिए महाराष्ट्र कैबिनेट ने दो बार प्रस्ताव भी भेजा, लेकिन राज्यपाल ने उस पर कोई फैसला नहीं किया। बाद में कोश्यारी ने ठाकरे को एमएलसी नामित करने पर फैसला टालते हुए गेंद चुनाव आयोग के पाले में डाल दी। उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र भेजा और अनुरोध किया है कि आयोग जल्द से जल्द महाराष्ट्र विधान परिषद की 9 खाली सीटों पर चुनाव घोषित करे। ईसी ने शुक्रवार को चुनाव के लिए हरी झंडी दे दी है। आयोग ने कहा है कि चुनाव के दौरान कोरोना को देखते हुए जरूरी गाइडलाइंस का पालन किया जाए।
​28 नवंबर को सीएम बने थे उद्धव


बदलते सियासी परिदृश्य में सीएम के पास विकल्प खत्म होते जा रहे थे। इस बीच चुनाव आयोग के फैसले से उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा टल गया है। उद्धव ने 28 नवंबर को सीएम की कुर्सी संभाली थी। उन्हें संविधान के तहत 6 महीने के अंदर किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। इलेक्शन कमिशन के निर्देश के बाद अब उद्धव की राह में कोई अड़चन नहीं दिख रही है। वह आसानी से विधान परिषद के लिए निर्वाचित हो सकते हैं। महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी की सरकार है। कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी के इस गठबंधन में शिवसेना और एनसीपी लगभग बराबर की हिस्सेदार हैं। 


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