कोरोना काल में मुसीबत में दिव्यांग, ट्रांसपैरंट मास्क की बढ़ी डिमांड


देहरादून
कोरोना काल  में मास्क सबसे जरूरी हो गए हैं। बिना मास्क लगाए घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं है लेकिन इसने दिव्यांगों की समस्या बढ़ा दी है। पिछले हफ्ते जरूरी सामान लेने घर से बाहर निकले संदीप अरोड़ा को भोपाल में एक पुलिसवाले ने रोक दिया। हियरिंग लॉस (Hearing Loss) की समस्या से जूझ रहे संदीप मुश्किल से ही समझ पा रहे थे कि मास्क) लगाए पुलिसवाला उनसे क्या कह रहा है, वह पुलिस को यह भी नहीं बता पाए कि वह ग्रॉसरी का सामान लेने के लिए घर से निकले थे, नतीजा उन्हें खाली हाथ घर लौटना पड़ा।
आज की तारीख में कोविड-19 से जंग में मास्क सबसे जरूरी हो गए हैं। भारत में बिना मास्क लगाए घर से बाहर निकलने पर भी रोक है लेकिन मास्क के चलते कम्यूनिकेशन की समस्या भी खड़ी हो रही है जिससे अरोड़ा जैसे हियरिंग लॉस से पीड़ित दूसरे 50 लाख लोग बहिष्कृत महसूस कर रहे हैं।


लिप-रीड करके ही समझ पाते हैं दूसरों की बात
बहरेपन से जूझ रहे लोग दूसरों के लिप रीड करके या फिर सांकेतिक इशारे से ही उनकी बातचीत समझ पाते हैं लेकिन मास्क के चलते ऐसे लोगों की कठिनाई और बढ़ गई है। 2011 की जनगणना के अनुसार, 26.7 लाख पुरुष और 23.9 लाख महिलाएं बहरेपन से जूझ रहे हैं।


कार्यकर्ताओं ने उठाई ट्रांसपैरंट मास्क की मांग
इसके चलते अब दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ताओं ने ट्रांसपैरंट मास्क की मांग उठाई है। देहरादून में नैशनल इंस्टिट्यूट फॉर इमपॉवरमेंट ऑफ पर्सन विद विजुअल डिसिबलिटीज (NIEPVD) पहले ही ऐसे 50 ट्रांसपैरंट मास्क बना चुका है और जरूरतमंद को बांटा जा चुका है। NIEPVD के डायेक्टर नचिकेता राउत ने कहा कि इंस्टिट्यूट के बुजुर्ग कर्मचारियों को मास्क के चलते दूसरों को समझने में मुश्किल हो रही थी जिसके बाद ट्रांसपैरंट मास्क की जरूरत महसूस की गई।


बायोडिग्रेडिबल प्लास्टिक से बने हैं मास्क
महाराष्ट्र के अली यवर जंग नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ स्पीच ऐंड हियरिंग डिसिबिलिटीज (AYJNISHD) को क्वॉलिटी टेस्ट के लिए मास्क सैंपल भेजे गए। NIEPVD के वाइस प्रिसिंपल अमित शर्मा ने बताया कि ये मास्क बायोपॉलिप्रोपाइलीन से बनाए गए हैं। यह बायोडिग्रेडेबल ईको फ्रेंडली प्लास्टिक है। उन्होंने बताया, 'हम जापानी टेक्नीक से इसे बना रहे हैं। यह बायोप्लास्टिक मटीरियल है जो पौधों से प्राप्त किया जाता है। इस केस में गन्ने से लिया जा रहा है।'


मास्क का क्वॉलिटी टेस्ट जरूरी
मुंबई स्थित AYJNISHD के डायरेक्टर सुनी एम मैथ्यू इस तरह के मास्क की डिमांड से सहमत हैं। वह बताते हैं कि इस तरह के मास्क की जरूरत है क्योंकि दो दिव्यांग इसकी मदद से एक-दूसरे से कम्यूनिकेट कर सकते हैं, इससे लिप रीड में मदद मिलेंगी। उन्होंने कहा, 'लेकिन क्वॉलिटी टेस्ट की जरूरत है क्योंकि कमजोर क्वॉलिटी वाले मास्क से नमी और दम घुटने की समस्या भी हो सकती है।' 


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