कोरोना संकट के बीच उद्धव सरकार ने पूरे किए 6 महीने, पूरा लेखा-जोखा


मुंबई
महाराष्ट्र की सत्ता पर ठाकरे सरकार को 6 महीने गुरुवार को पूरे हो गए। अगर सरकार के इन 6 महीनों के कार्यकाल का आकलन किया जाए तो गठबंधन सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि चालाक विपक्ष के मंसूबों को धराशायी करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को विधान परिषद का सदस्य निर्वाचित कराना रही है। अन्यथा, इस सरकार की हालत सिर मुंडाते ही ओले पड़ने जैसी है।
जब महाविकास आघाडी सरकार शपथ ले रही थी, तब यह कहा जा रहा था कि तीन दलों की यह सरकार 6 महीने से ज्यादा नहीं चल पाएगी। इसके पीछे कई तर्क दिए जा रहे थे, लेकिन अब राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कोरोना ने ठाकरे सरकार की उम्र बढ़ा दी है। कोरोना का संकट इतना बड़ा है कि सरकार में शामिल तीनों पार्टियों द्वारा तैयार किया गया कॉमन मिनिमम प्रोग्राम अब अप्रासंगिक हो गया है। महामारी ने सरकार की प्राथमिकताएं बदल दी हैं। सरकार के सामने फिलहाल दो ही चुनौतियां हैं, एक कोरोना से पार पाना और दूसरी राज्य की आमदनी बढ़ाना।


जनता का मुख्यमंत्री में बढ़ा भरोसा
पिछले 3 महीने में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कोरोना वायरस के संदर्भ में राज्य की जनता से जो संवाद स्थापित किया है, उससे राज्य की जनता का भरोसा मुख्यमंत्री में बढ़ा है। उद्धव ठाकरे में जनता का बढ़ता भरोसा ही विपक्ष में बैठी बीजेपी के लिए बेचैनी का सबब बन गया है। यही वजह है कि कोरोना संकट से जूझते हुए उद्धव ठाकरे सरकार को राष्ट्रपति शासन के खतरे के प्रति भी सजगता बरतनी पड़ रही है।


ठाकरे सरकार का सौभाग्य है कि इस सरकार में कांग्रेस और एनसीपी के कई अनुभवी नेता मंत्री हैं, वर्ना विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में जो राजनीतिक हालत थी उसमें तो राज्य का भगवान ही मालिक था। इन पिछले 6 महीनों में राज्य की महाविकास आघाडी और विशेषकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के कार्यकाल का अगर विश्लेषण किया जाए, तो वह खराब नहीं कहा जा सकता। राजभवन की ताकत से टकराते, बीजेपी के दांव-पेंचों से खुद को बचाते जनता के बीच एक सकारात्मक छवि बनाने में महाविकास आघाडी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सफल रहे हैं।


कोरोना ने किया खजाना खाली
सरकार के सामने अगली चुनौती किसान कर्जमाफी का चुनावी वादा पूरा करने की है, क्योंकि कोरोना ने राज्य का खजाना खाली करा दिया है। हालांकि, सरकार का दावा है कि वह किसानों से किया गया कमिटमेंट पूरा करेगी। सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन दे पाना सरकार की दूसरी बड़ी चुनौती है। केंद्र में बैठी बीजेपी सरकार से ठाकरे सरकार मदद की बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकती, इसलिए यह चुनौती और भी कठिन हो गई है। सरकार के पिछले 3 महीने कोरोना में लड़ाई में गुजर गए।


अलबत्ता महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों की संख्या देश में सबसे ज्यादा है इसलिए ठाकरे सरकार की आलोचना भी हो रही है लेकिन सरकार के लिए दिलासे वाली बात यह है कि महाराष्ट्र में अब तक कोरोना मरीजों की तादाद और उससे होने वाली मौतों की संख्या अभी उतनी नहीं है, जितनी दुनिया के दूसरे मुल्कों में थी। 


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