लॉकडाउन में बाहर नहीं जा पाया, तो 12 साल के बच्चे ने की खुदकुशी


मुंबई
मुंबई से सटे मीरा-भयंदर इलाके में लॉकडाउन में बाहर घूमने और खेलने का मौका न मिलने के कारण मीरा रोड में 12 साल के एक लड़के ने खुदकुशी कर ली। सलीम (बदला हुआ नाम) मीरा-रोड के एक स्कूल में छठी कक्षा का विद्यार्थी था। वह 25 मई को ईद मनाने के बाद रात में डेढ़ बजे सोया। उसके पिता बताते हैं कि अगले दिन सुबह छह बजे तक वह अपने कमरे में सोया था। सुबह 7 बजे उसके कमरे में गए, तो उसे पंखे से लटका हुआ देखा। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पिता ने बताया, ‘हमारा बेटा लॉकडाउन से पहले रोज शाम को पार्क में साइकल चलाने और खेलने जाता था। लॉकडाउन के शुरूआती चरण में वह बाहर जाने की जिद करता था, लेकिन बार-बार मना करने पर मान गया था। उसने पंखे पर लटकने से पहले वॉट्सऐप पर अपने एक दोस्त से घर में बोर होने की बात कही थी। हमें बिलकुल अहसास नही था कि वह बाहर न जान पाने के कारण इतना डिप्रेस था, वरना हम खुद उसे बाहर खेलने और घुमाने के लिए लेकर जाते।’ बच्चे की क्लास टीचर ने बताया, ‘वह बहुत ऐक्टिव लड़का था और क्लास का मॉनिटर भी रह चुका था।’


‘डिप्रेशन को बदलाव से पहचानें’
मनोचिकित्सक डॉक्टर एस. दानिश बताते है, ‘लॉकडाउन का बच्चों पर भावनात्मक रूप से बुरा असर पड़ रहा है। वे अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं। बच्चों को लगता है कि वे किसी जाल में फंस चुके हैं। इसीलिए लॉकडाउन में बच्चों पर खास ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों में डिप्रेशन को उसके व्यवहार में बदलाव से पहचाना जा सकता है। डिप्रेशन होने पर बच्चा हमेशा कुछ संकेत जरूर देता है।’


इन बातों का रखें ध्यान
- माता-पिता सोशल मीडिया पर वक्त बिताने के बजाय बच्चों के साथ गपशप करें।
- बच्चों को भी सोशल मीडिया की ज्यादा लत न लगने दें।
- बच्चों में नई हॉबीज पैदा करें।
- ध्यान दें कि बच्चा पूरी नींद ले रहा है या नहीं।