मजदूरों की घर पहुंचने की जद्दोजहद-पीछे कोरोना का खौफ और आगे भूख और बेबसी पैर थमने नहीं दे रही,


बस्सी. बस्सी। कोरोना का खौफ तथा भूख और बेबसी मजदूरों की जान पर भारी पड़ रही है। लॉकडाउन में श्रमिकों का हजारों किलोमीटर की यात्रा कर अपना घर पहुंचना जारी है। मजदूरों के सुरक्षित सफर और उनकी सुविधाओं को लेकर तमाम सरकारी दावे खोखले ही साबित हो रहे हैं। इन दावों से इतर मजदूरों को तपती गर्मी में गिरते पड़ते अपने ठिये पर पहुंचने के लिए रोजाना कई-कई किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ रहा है। रास्ते में उनके साथ धोखाधड़ी और जारी है।



भीलवाड़ा से बिहार के निकला 16 मजूदरों का जत्था रविवार को जयपुर जिले के बस्सी से होकर गुजरा। बिहार के गोपालगंज जा रहे एक मजदूर नन्हें ने बताया कि वे 16 लोग हैं। किसी ने उन्हें बिहार छोड़ने की बता कहीं थी और इसी में सात दिन निकाल दिए। सात दिन रिलीफ सेंटर में भी गुजारे मगर वहां ना ठीक से भोजन का प्रबंध था, ना ही वहां से जाने के कोई आसार दिखाई दिए। ऐसे में ये लोग रविवार सवेरे पैदल ही रवाना हो गए। मजदूर के अनुसार उसे गुमराह और किया गया जिससे वह कई दिन यहीं रुका रहा।



इसी तरह दौसा जिले में नांगल प्यारीवास निवासी मुकेश मीणा, महाराष्ट्र के पुणे से पैदल अपने घर के लिए निकला था। उसके अनुसार 4 दिन पहले वो राजस्थान की सीमा में घुसा, मगर बीते चार दिनों में ना उसे किसी ने टोका और ना ही किसी रिलीफ कैंप में उसे रोका गया। वह अपने सफर को लेकर परेशान तो बहुत था, मगर घर पहुंचने को लेकर खुश भी। मुकेश ने बताया कि उसके साथ और लोग भी हैं। प्रवासियों ने बताया कि पुलिस ने उनसे कहा कि जैसा भी साधन मिले उससे चले जाओ। 


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