फसल की दुश्मन / सीकर जिले में पहुंचा टिड्‌डी दल, नीमकाथाना से हरियाणा की ओर जा रही टिडि्डयां हवा का रुख बदलते ही लौटीं, ग्रामीण बोले ऐसा नजारा पहली बार देखा


नीमकाथाना.पाकिस्तान से बाड़मेर होता हुआ टिड्‌डी दल बुधवार को सीकर जिले के नीमकाथाना में पहुंच गया। टिड्डी दल नांगल ग्राम पंचायत नाथा की नांगल से होकर ग्राम पंचायत दयाल का नांगल ग्राम झालरा में पहुंच गया। इनके आने से ग्रामीण परेशान हैं तो प्रशासन में हड़कंप की स्थिति बन गई है। पिछली बार प्रदेश के 12 जिले टिडि्डयों के हमले चपेट में आए थे। नीमकाथाना में प्रवेश करने के बाद टिडि्डयों ने हरियाणा का रुख कर लिया था, लेकिन हवा का रुख बदलते ही ये वापस लौट आईं। यूएन ने चेतावनी जारी कर दी है कि राजस्थान में इस बार टिडि्डयों का हमला पिछली बार से दो से तीन गुना ज्यादा हो सकता है।


ग्रामीण इलाकों में लोगों ने पीपे थाली बजाकर इनको भगाया। कृषि अधिकारियों ने बताया कि टिडि्डयां रात को एक ही जगह ठहर जाती हैं और दिन में लगातार चलती हैं। ये रास्ते में आने वाली फसलें, पेड़-पौधे चटकर जाती हैं। आसमान में ये धूल के गुबार की तरह उठती हैं। ग्रामीण बोले उन्होंने अपने जीवन में ऐसा नजारा पहली बार देखा है। इस बार यह जयपुर की सीमा तक आ पहुंची हैं। खतरे को देखते हुए प्रशासन ने इसके लिए तेजी से तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। इस साल पहली बार 11 अप्रैल को राज्य में टिड्डी दलों का प्रवेश हुआ और अब तक वे जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, नागौर, अजमेर, पाली, बीकानेर, सिरोही एवं भीलवाड़ा जिलों में लगभग 37 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को प्रभावित कर चुकी हैं।


कलेक्टरों को निर्देश ; कमेटियों की तैयारियां पूरी करें
टिड्डी नियंत्रण के लिए कलक्टरों की अध्यक्षता में गठित समितियों को तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारी से कहा गया है कि मौके पर पर्याप्त कीटनाशक की उपलब्धता सुनिश्चित रखें ताकि टिड्‌डी दल का हमला होते ही तुरंत कीटनाशकों का छिड़काव किया जा सके।


वॉट्स एप ग्रुप बनाकर पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर सांसद तक सभी जनप्रतिनिधियों को जोड़ा जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर सूचनाएं तेजी से पहुंचाई जा सकें। कृषि मंत्री लाल चंद कटारिया ने बताया कि टिड्डी प्रभावित जिलों में रिक्त पदों पर अन्य जिलों से कार्मिक नियुक्त किए जा रहे हैं और शेष शीघ्र ही नई भर्ती से चयनित सहायक कृषि अधिकारी एवं कृषि पर्यवेक्षकों को नियुक्ति दी जाएगी, जिससे अभियान में कर्मचारियों की कोई कमी नहीं रहेगी।


पिछली बार ये 12 जिले हुए थे प्रभावित 
पिछले साल टिड्‌डी दल ने 22 मई को जैसलमेर के फतेहगढ़ से राजस्थान में प्रवेश किया था और यहां 7 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में किसानों की फसलें तबाह कर दिया। पिछले साल टिडि्डयों के हमले में जैसलमेर, बाड़मेर, जोधुपर, बीकानेर, जालौर, सिरोही, पाली, नागौर, उदयपुर, चूरू, हनुमानगढ़, गंगानगर में सरसों, जीरा, ईसबगोल और गेहूं की फसल को टिड्डी चौपट हो गई थी। इन जिलों के लिए कंटीनजेंसी प्लान पहले तैयार किया जा चुका है। इस साल नए जिलों में टिडि्डयों के प्रकोप को देखते हुए संबंधित कलेक्टरों को कलक्टर से कंटीनजेंसी प्लान स्वीकृत कराकर मुख्यालय भिजवाने के निर्देश दिए गए हैं। जिन स्थानों पर गाड़ियां पहुंचने में मुश्किल होती है वहां ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव किया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है। 


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