प्रवासी मजदूरों का नैशनल डेटाबेस, साल में एक बार घर जाने का किराया, पेंशन और हेल्थ बेनिफिट...सरकार लाएगी नया कानून


नई दिल्ली
कोराना वायरस के दौर (Coronavirus Pandemic) में जारी प्रवासी संकट से सबक लेते हुए सरकार 41 सालों बाद 'प्रवासी मजदूर' को फिर से परिभाषित करने की तैयारी कर रही है। सरकार अब प्रवासी मजदूरों को फिर से परिभाषित कर उनके पंजीकरण की योजना बना रही है ताकि उन्हें सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के दायरे में लाया जाए। रजिस्ट्रेशन के बाद इन प्रवासी मजदूरों को इम्प्लॉयीज स्टेट इंश्योरेस कॉर्पोरेशन के तहत हेल्थ बेनिफिट भी मिल सकेगा।

लॉकडाउन के दौरान बड़े पैमाने पर लाखों की संख्या में संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के पैदल पलायन के बाद अब नए कानून की तैयारी की जा रही है। केंद्रीय श्रम मंत्रालय जल्द ही कैबिनेट को इस बारे में विस्तृत प्रस्ताव भेजने वाला है। केंद्र सरकार की योजना है कि प्रस्तावित कानून को इस साल के आखिर तक लागू कर दिया जाए।


श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने इस बात की पुष्टि की कि कानूनी पहलुओं को मजबूत किया जा रहा है। बीजेडी सांसद भतृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति ने जिस प्रस्वावित कोड को मंजूरी दी है, उसके कुछ प्रावधानों में और बदलाव किया जा सकता है।


प्रवासी संकट से जाहिर हुईं कमियां
मौजूदा प्रवासी संकट ने सिस्टम की कमियों को भी उजागर किया है। प्रवासी मजदूरों का कोई एकीकृत रेकॉर्ड तक नहीं है। इंटर-स्टेट माइग्रैंट वर्कमेन ऐक्ट 1979 भी सिर्फ उन संस्थानों या कॉन्ट्रैक्टरों पर लागू होता है जहां 5 या उससे ज्यादा इंटर-स्टेट प्रवासी मजदूर काम करते हैं। इसका मतलब है कि प्रवासी मजदूरों का एक बड़ा तबका इसके दायरे में आता ही नहीं है। रेहड़ी-पटरी लगाने वालों से लेकर घरों में काम करने वाली मेड तक इस कानून के दायरे में नहीं हैं।


...तो मजदूरों को साल में एक बार घर जाने का मिलेगा किराया
प्रस्तावित कानून हर प्रवासी कामगार पर लागू होगा जो एक निश्चित रकम तक कमाते हैं। इसमें डोमेस्टिक हेल्प भी शामिल होंगे। सूत्रों ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि प्रस्तावित कानून में ऐसे प्रावधान किए जाएंगे जिससे प्रवासी मजदूरों को देश में कहीं भी उनके लिए सरकार की तरफ से तय किए बेनिफिट मिलें यानी बेनिफिट पोर्टेबिलिटी का लाभ मिलेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रवासी मजदूरों को साल में एक बार अपने घर जाने के लिए किराया मिलने का हकदार बनाया जाएगा।


असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का बनेगा डेटाबेस, दी जाएगी पहचान संख्या
प्रस्तावित योजना का एक अहम हिस्सा असंगठित क्षेत्र के वर्करों का डेटाबेस बनाना है। ऐसे मजदूरों को एक खास तरह की पहचान संख्या दी जाएगी जिसे अनऑर्गनाइज्ड वर्कर आइडेंटिफिकेशन नंबर (U-WIN) नाम से जाना जाएगा। इस बारे में 2008 में ही प्रस्ताव तैयार किया गया था लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई थी। सरकार प्रवासी मजदूरों को पेंशन और हेल्थकेयर जैसे सामाजिक सुरक्षा के लाभ के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। 
आधार कार्ड से लिंक होगा नैशनल डेटाबेस
इस कवायद के जरिए प्रवासी मजदूरों का आधार कार्ड से लिंक एक नैशनल डेटाबेस बनाने का प्रस्ताव है। इस डेटाबेस तक केंद्र के साथ-साथ राज्यों की भी पहुंच होगी। इसे बनाने में राज्यों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।


ताकि हर मजदूर को मिल सके सामाजिक सुरक्षा और हेल्थ बेनिफिट
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए एक पेंशन स्कीम पहले से ही है। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अब उन्हें नाम मात्र की फीस पर ESIC में पंजीकरण कराने की सुविधा देने की तैयारी चल रही है। इसके जरिए उन्हें हेल्थकेयर सुविधाएं मिल सकेंगी। ESIC के दायरे को और बढ़ाया जाएगा ताकि सभी जिलों में मजदूरों को इसके दायरे में लाया जाए और उन्हें हेल्थ बेनिफिट मिल सके। 


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