राजीव बिंदल ने हिमचाल बीजेपी चीफ पद से क्यों दिया इस्तीफा? जानें असल वजह


शिमला


हिमाचल प्रदेश में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने इस्तीफा बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कोरोना संकट के बीच पीपीई किट की खरीद में भ्रष्टाचार का मामला सामने आने के बाद बिंदल ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया है।


अपने इस्तीफे में बिंदल ने कहा कि परोक्ष रूप से बीजेपी सरकार पर लगने वाले आरोपों के चलते नैतिक आधार पर उन्होंने इस्तीफा दिया है, ताकि मामले को लेकर चल रही जांच को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं किया जा सके। हफ्ते भर पहले एक ऑडियो क्लिप की जांच के बाद ऐंटी करप्शन ब्यूरो ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक डॉ. एके गुप्ता को गिरफ्तार किया था। ऑडियो में दो लोगों को कथित तौर पर पांच लाख के रिश्वत के बारे में बातचीत करते सुना गया।


बीजेपी नेता ने साधा निशाना
पूर्व बीजेपी सीएम शांता कुमार ने इसे लेकर अपनी ही सरकार पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इसने हर किसी का सिर शर्म से झुका दिया है। इस्तीफा देने वाले बिंदल ने हालांकि, इस मामले से उनका कोई संबंध होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा, 'स्वास्थ्य सेवाओं के डायरेक्टर का एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ, जिसके आधार पर राज्य सरकार ने ऐक्शन लिया और डायरेक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें अरेस्ट किया।'


बीजेपी पर उंगली उठा रहे लोग
उन्होंने कहा, 'मामले की जांच निगरानी ब्यूरो कर रही है। इस बीच कुछ लोग परोक्ष रूप से बीजेपी पर उंगली उठा रहे हैं। चूंकि मैं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हूं इसलिए चाहता हूं कि मामले की पूरी तरह से जांच हो। जांच किसी तरह से भी प्रभावित न हो और यह हर तरह के दबाव से मुक्त हो इसलिए नैतिक आधार पर मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि मैं केवल उच्च नैतिक आधार पर इस्तीफा दे रहा हूं इसका कोई और अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।'


बीजेपी का घोटाले से कोई लेना-देना नहीं
बिंदल ने अपने त्यागपत्र में साफ-साफ कहा कि हिमाचल प्रदेश बीजेपी का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने अपने पत्र में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में बीजेपी सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का जमकर बखान किया। गौरतलब है कि बिंदल पांच बार से विधायक रहे हैं और आयुर्वेदिक मेडिसिन ऐंड सर्जरी से ग्रेजुएट हैं। वह तीन बार सोलन से और दो बार नाहन से विधायक चुने गए। जब उन्हें बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, तब वह राज्य विधानसभा के अध्यक्ष भी थे।