सीएमआईई सर्वे / एक हफ्ते और लॉकडाउन बढ़ा, तो देश के एक तिहाई परिवार सड़क पर आ जाएंगे


नई दिल्ली. कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने जिस लॉकडाउन की शुरुआत 25 मार्च से की थी, वो तीन फेज के बाद चौथे फेज में भी जारी रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इस बात की घोषणा की। इस बीच सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के एक सर्वे में कहा गया कि लॉकडाउन एक हफ्ते और आगे बढ़ा, तो भारतीय परिवारों में से एक तिहाई से अधिक के पास जीवनयापन के लिए जरूरी संसाधन खत्म हो जाएंगे। लॉकडाउन का तीसरा फेज 17 मई को खत्म होने वाला है।


84% से अधिक घरों में मासिक आमदनी में गिरावट
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी ने कोरोनावायरस की वजह से लगे लॉकडाउन से घरेलू आमदनी पर आधारित स्टडी की गई है। इसमें कहा गया है कि भारत के 84 फीसदी से ज्यादा घरों की मासिक आमदनी में गिरावट दर्ज की गई है। देश में कामकाजी आबादी का 25% हिस्सा इस समय बेरोजगार हो चुका है।


देश में 34% घरों की स्थिति खराब
इस बारे में सीएमआईई के चीफ इकनॉमिस्ट कौशिक कृष्णन ने कहा, ‘अगर पूरे देश की बात करें तो 34 फीसदी घरों की स्थिति खराब हो चुकी है। उनके पास एक हफ्ते के लिए जीवन जीने के जरूरी संसाधन बचे हैं। एक हफ्ते के बाद उनके पास कुछ भी नहीं बचा होगा।’ उन्होंने ये भी कहा कि समाज में कम आय वर्ग के लोगों को तुरंत मदद किए जाने की जरूरत है। इसके लिए ऐसे वर्ग के लोगों को जल्द नकदी ट्रांसफर करने की जरूरत है। यदि सरकार जल्द मदद नहीं की तब कुपोषण और गरीबी की वजह से होने वाली अन्य समस्याओं में भी तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है।


2.70 करोड़ युवाओं की नौकरी गई
सीएमआईई की स्टडी के मुताबिक देश में बेरोजगारी के आंकड़े भी तेजी से बढ़े हैं। 21 मार्च को भारत में बेरोजगारी की दर 7.4 फीसदी थी, जो 5 मई को बढ़कर 25.5 फीसदी हो गई है। स्टडी के मुताबिक देश में 20 से 30 साल आयु वर्ग के 2 करोड़ 70 लाख युवाओं को अप्रैल में नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।


बिहार, हरियाणा, झारखंड जैसे राज्यों की चिंता
बेरोजगारी बढ़ने के चलते देश के ज्यादातर घरों की आमदनी में कमी आई है। अगर भारत के शहरी और ग्रामीण इलाकों की बात करें तो शहरी इलाकों में 65 फीसदी परिवारों के पास 1 हफ्ते से अधिक के लिए जीने के संसाधन बचे हैं, जबकि ग्रामीण घरों में 54 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके पास 1 हफ्ते से अधिक के लिए जीने के संसाधन बचे हैं। दिल्ली, पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों में लॉकडाउन का असर कम हुआ है, जबकि बिहार, हरियाणा और झारखंड जैसे राज्यों में लोन की वजह से लोगों की आमदनी पर काफी असर पड़ा है।