सेफ रहेगा स्टाफ', पड़ोंसियों को भरोसा दिला रहे कंपनियों के HR

 



मुंबई
गुरुग्राम की मैट्रिक्स क्लोदिंग के कारखानों में काम करने के लिए आसपास के गांवों से श्रमिक जा रहे थे, लेकिन गांववालों ने उन्हें रोक दिया। यह कंपनी फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए प्रोटेक्टिव कवरऑल्स बनाती है। इसके मैनेजिंग डायरेक्टर गौतम नायर ने बताया कि ग्रामीणों को डर है कि इन श्रमिकों की वजह से वे भी वायरस की चपेट में आ सकते हैं। इस घटनाक्रम के चलते कंपनी का एचआर डिपार्टमेंट श्रमिकों के गांव में गया और उन्हें कपड़ा मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन से मिली मंजूरी का पत्र दिखाया। एचआर डिपार्टमेंट ने गांववालों को समझाया कि श्रमिकों का काम पर जाना कैसे देश की महामारी से जंग लड़ने में मदद करेगा।
आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियां उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं और उनके ह्यूमन रिसोर्सेज डिपार्टमेंट को न सिर्फ कर्मचारियों को कोविड-19 का प्रसार रोकने के लिए अपनाए गए ठोस उपायों और सेफ्टी प्रोटोकॉल के बारे में समझाना पड़ रहा है, बल्कि उनके पड़ोसियों को भी यही भरोसा दिलाना पड़ रहा है।


ई-कॉमर्स, पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट की मैन्युफैक्चरिंग, IT सर्विसेज और फूड डिलिवरी के कारोबार से जुड़ी कई कंपनियों का कहना है कि उनके एचआर स्टाफ को सरकारी परमिट और सेफ्टी मैन्युअल के साथ कर्मचारियों के गांवों और हाउसिंग कम्युनिटीज समुदायों में जाना पड़ता है। नायर ने कहा, 'एचआर स्टाफ के समझाने के बाद वे श्रमिक अपने गांवों के हीरो बन गए हैं। गांव के बड़े-बुजुर्गों ने उन्हें आशीर्वाद देकर अपना नेक काम जारी रखने के लिए कहा है।'


इसी तरह ऑनलाइन ग्रॉसरी सेलर्स ग्रोफर्स के गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद गोदामों के आसपास रहने वाले लोग भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे क्योंकि इन जगहों पर कभी भी आ जाने वाले ऑर्डर को पूरा करने के लिए कर्मचारी आते जाते रहते हैं। ग्रोफर्स का फाउंडर सौरभ कुमार ने बताया कि उनके एचआर डिपार्टमेंट ने गांव वालों को समझाया कि उनका वर्कप्लेस एकदम सुरक्षित है और उन लोगों को साफ-सफाई से से जुड़े वीडियो भी दिखाए। उन्होंने कहा, 'हमने गांव वालों को बुलाकर कहा कि वे हमारे गोदाम देखकर खुद तसल्ली कर लें। हमने पुलिस से भी सहयोग लिया।'


स्टाफिंग कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली उद्योग संस्था इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन के प्रेजिडेंट लोहित भाटिया का कहना है कि जनता सख्त लॉकडाउन और इसके बारे में रोजाना मीडिया की बातें सुनकर काफी सहमी हुई है। कई स्टाफिंग कंपनियों ने बताया है कि जब उन्हें एसेंशियल सेक्टर्स की कंपनियों की ओर से बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए अधिक कर्मचारियों को नियुक्त करना शुरू किया तो उन्हें गांव वालों से गतिरोध का सामना करना पड़ा। भाटिया ने कहा, 'चाहे लड़का हो या लड़की, उनके पड़ोसियों ने धमकाना शुरू किया कि अगर वे बाहर जाते हैं तो उन्हें आने नहीं दिया जाएगा और उनको अपना घर खाली करना होगा।' 


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