बाबरी विध्वंस केस: एक आरोपी से एक हजार सवाल / गांधी यादव कोर्ट में पेश; वेदांती को 9 जून की तारीख मिली, कहा- वहां मस्जिद नहीं थी


लखनऊ. अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढांचा विध्वंस मामले में शुक्रवार को फिर सीबीआई की विशेष अदालत में न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव के समक्ष आरोपियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। शुक्रवार को आरोपी पवन पांडेय के अलावा संतोष दुबे, गांधी यादव गजानन संयासी कोर्ट पहुंचे। सबसे पहले गांधी यादव के बयान दर्ज हो रहे हैं। यादव साल 1992 में शिवसेना के अध्यक्ष थे। वहीं, कुछ देर बाद राम विलास वेदांती भी सीबीआई कोर्ट पहुंचे। लेकिन उन्हें अब 9 जून की तारीख मिली है। इसके बाद वेदांती वापस लौट गए।


मंदिर का खंडहर हटाया था, जिससे रामलला को क्षति न पहुंचे: वेदांती
इस मौके पर राम विलास वेदांती ने कहा- सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर जब अपना निर्णय सुना दिया है तो उसके बाद सारे मुकदमें खत्म हो जाने चाहिए। मुझे आश्चर्य है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद हाईकोर्ट इसकी सुनवाई क्यों कर रहा है? लेकिन न्यायाधीशों ने बुलाया है तो उनके बुलावे पर आया हूं। मैंने पहले भी कहा और कल भी हाजिरी में कहा था कि वहां पहले कोई मस्जिद थी ही नहीं। आज भी मैं यही कहूंगा। वहां मंदिर का खंडहर था। जहां रामलला विराजमान थे। यदि खंडहर गिरता तो रामलला को क्षति पहुंचती, इसलिए हम लोगों ने खंडहर को हटाया। मंदिर के खंडहर के तोड़ने के आरोप में यदि मुझे फांसी या आजीवन कारावास भी होता है तो उसके लिए भी तैयार हूं। 


कल आरोपी विजय बहादुर से एक हजार सवाल पूछे गए थे


गुरुवार को आरोपी विजय बहादुर से हजार सवाल पूछे गए थे। उन्होंने कहा- मामला राजनीति से प्रेरित होने की वजह से उन्हें फंसाया जा रहा है। उनसे जब एक ऑडियो कैसेट के विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये तोड़ मरोड़ कर बनाया गया है। प्रस्तुत फोटोग्राफ की निगेटिव पत्रावली में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसको साक्ष्य में नहीं पढ़ा जाएगा। वहीं, कल्याण सिंह, साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती, ब्रजभूषण शरण सिंह, महंत नृत्यगोपाल दास, साक्षी महाराज, आरएन श्रीवास्तव समेत 31 आरोपियों की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने हाजिरी माफी प्रार्थना पत्र दिया था। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। 


साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहें तो लिखित बयान के रूप में दर्ज कराएं: कोर्ट


अदालत ने आदेश में कहा कि धारा 313 के तहत प्रश्नों की संख्या अधिक होने के कारण समय शेष नहीं रह गया। इस वजह से सभी गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए जा सके हैं। अन्य गवाहों के बयान पांच जून यानि आज दर्ज होंगे। अगर बयानों के बाद आरोपित अपने साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहेंगे तो वे लिखित बयान के रुप में दर्ज करा देंगे, ताकि मुकदमे की कार्यवाही पूरी की जा सके। 


49 आरोपी बनाए गए थे, 32 बचे जीवित
28 साल पहले यानी 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में थाना राम जन्मभूमि में एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच करते हुए 49 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। इस मामले में पूर्व गृहमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, पवन कुमार पांडेय, बृजभूषण शरण सिंह, सतीश प्रधान, विनय कटियार, साध्वी ऋतभरा, राम विलास वेदांती, चंपत राय, नृत्यगोपाल दास, लल्लू सिंह, महंत धर्मदास, साक्षी महाराज, आरएन श्रीवास्तव आरोपियों में शामिल हैं। आरोपियों में 32 जीवित हैं, जबकि 19 की मौत हो चुकी है। मामले में सीबीआई की तरफ से बीते बुधवार को गवाही पूरी हो चुकी है। 


सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त तक फैसला सुनाने का निर्देश दिया था
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की विशेष न्यायाधीश को बाबरी मस्जिद विध्वंस केस को 31 अगस्त तक पूरा करने का आदेश दिया था। इससे पहले मामले में अप्रैल माह तक फैसला सुनाया जाना था। ट्रायल न्यायाधीश एस यादव ने 6 मई को शीर्ष अदालत को पत्र लिखकर समय बढ़ाने की मांग की थी। जिसमें कहा गया था कि साक्ष्य की रिकॉर्डिंग अभी पूरी नहीं हुई है। 


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